
Breaking News: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सरकारी स्कूल के निर्माण में इस्तेमाल की गई निजी जमीन के बदले राज्य शासन को वैकल्पिक भूमि देने का निर्देश दिया है। अदालत ने अधिकारियों को याचिकाकर्ता की सहमति से 0.15 एकड़ के बराबर उपयुक्त जमीन उपलब्ध कराने के लिए 90 दिन के भीतर जरूरी आदेश पारित करने को कहा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के पिता की कथित सहमति के आधार पर उसकी निजी जमीन का इस्तेमाल वैध नहीं माना जा सकता।
यह मामला बिलासपुर जिले के मस्तूरी तहसील का है। यहां के निवासी आशीष अवस्थी खसरा नंबर 66/14 की कुल 85 डिसमिल जमीन के दर्ज भूमिस्वामी हैं। यह जमीन 21 जनवरी 2021 को उनके नाम दर्ज हुई थी। उनकी जमीन से लगी सरकारी भूमि पर बालक प्राथमिक शाला संचालित है। स्कूल के विद्यार्थियों और कर्मचारियों की सुविधा के लिए शेड, रसोईघर और शौचालय का निर्माण कराया गया था। इन निर्माण कार्यों में आशीष की निजी जमीन का करीब 0.15 एकड़ हिस्सा इस्तेमाल किया गया।
आशीष अवस्थी ने अपनी जमीन पर हुए निर्माण को लेकर तहसीलदार के समक्ष आवेदन दिया था। उन्होंने जमीन का कब्जा वापस दिलाने की मांग की। इस पर तहसीलदार ने 29 दिसंबर 2022 को कब्जा लौटाने का आदेश जारी किया। हालांकि, स्कूल के विद्यार्थियों और कर्मचारियों को असुविधा न हो, इसे देखते हुए आशीष ने जमीन के बदले समान मूल्य की वैकल्पिक सरकारी भूमि देने की मांग की।
आशीष की मांग पर अतिरिक्त कलेक्टर ने 27 नवंबर 2024 को आवेदन खारिज कर दिया था। इसके पीछे तर्क दिया गया कि उनके पिता दुर्गा सहाय अवस्थी वर्ष 2005 से 2010 तक गांव के सरपंच थे और उस दौरान स्कूल निर्माण पर उन्होंने कोई आपत्ति नहीं जताई थी। इसके बाद आशीष ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने कहा कि पिता की कथित सहमति निजी जमीन के इस्तेमाल को वैध नहीं ठहरा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमीन स्वेच्छा से देने, सहमति या समझौते से जुड़े वैधानिक प्रमाण के बिना निजी संपत्ति का उपयोग उचित नहीं है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में विद्या देवी बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति को कानून के अधिकार के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।
हाई कोर्ट ने अधिकारियों को याचिकाकर्ता की सहमति लेकर आदेश की प्रति प्राप्त होने के 90 दिन के भीतर जरूरी आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। इसके तहत आशीष अवस्थी को इस्तेमाल की गई 0.15 एकड़ जमीन के बराबर उपयुक्त वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अदालत ने याचिका का निराकरण कर दिया।