
Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के चर्चित पोखन यादव हत्याकांड में हाई कोर्ट ने तीनों दोषियों को बड़ा झटका दिया है। बिलासपुर हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद आरोपियों की अपील खारिज कर दी और निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा। अदालत ने माना कि हत्या पहले से योजना बनाकर की गई थी और मामले में पेश किए गए गवाहों, मेडिकल रिपोर्ट तथा अन्य साक्ष्यों से आरोप साबित होते हैं। कोर्ट ने कहा कि दोषियों को राहत देने का कोई ठोस आधार नहीं है, इसलिए उनकी सजा यथावत रहेगी।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद दोषी राजा साहू, दीलू साहू और दुर्गेश कुमार उर्फ बुलाती साहू की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्य और गवाहों के बयान आरोपियों की संलिप्तता को स्पष्ट रूप से साबित करते हैं।
मुंगेली जिले के चर्चित पोखन यादव हत्याकांड में बिलासपुर हाई कोर्ट ने तीनों दोषियों की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को सही ठहराते हुए बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि मामले में प्रस्तुत गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्य स्पष्ट रूप से आरोपियों के खिलाफ हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि हत्या सुनियोजित तरीके से की गई थी और अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में सफल रहा। ऐसे में दोषियों को किसी प्रकार की राहत देने का आधार नहीं बनता।
उसी दिन ससुराल से लौट रहे पोखन यादव को मुंगेली के अवासपारा स्थित शराब दुकान के पीछे कच्चे रास्ते पर रोक लिया गया। आरोप है कि राजा साहू और दीलू साहू ने चाकू से उसके गले, सिर और माथे पर कई वार किए। वहीं दुर्गेश कुमार उर्फ बुलाती साहू मौके पर पहरा देता रहा ताकि कोई हस्तक्षेप न कर सके।
हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद तीनों आरोपी मौके से फरार हो गए थे। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर 26 अक्टूबर 2023 को सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया गया।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मामले में मौजूद चश्मदीद गवाहों के बयान, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की रिपोर्ट अभियोजन के पक्ष को मजबूती प्रदान करती है। सभी साक्ष्य एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं और आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करते हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि निचली अदालत का फैसला तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर सही था। इसलिए दोषियों को दी गई उम्रकैद की सजा में किसी प्रकार का हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। इसके साथ ही तीनों दोषियों की अपील को खारिज कर सजा को यथावत रखा गया। मुंगेली जिले में चर्चित रहे इस हत्याकांड पर हाई कोर्ट के फैसले के बाद कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। अदालत के इस निर्णय को पीड़ित पक्ष के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।