बिलासपुर

Bilaspur Nagar Chunav: कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाने की तैयारी में भाजपा, वार्ड 29 में प्रत्याशी चयन पर मंथन

Nagar Chunav 2026: बिलासपुर के वार्ड 29 संजय गांधी नगर उपचुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस अपने पारंपरिक गढ़ को बचाने में जुटी है, जबकि भाजपा पहली जीत की रणनीति बना रही है।
2 min read
Bilaspur Nagar Chunav
भाजपा और कांग्रेस। पत्रिका फाइल फोटो

Bilaspur Nagar Chunav: नगर निगम के वार्ड क्रमांक 29 संजय गांधी नगर उपचुनाव की घोषणा होते ही बिलासपुर की सियासत गरमा गई है। सोमवार से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और 18 मई तक उम्मीदवार नामांकन दाखिल करेंगे। 1 जून को मतदान और 4 जून को मतगणना होगी। लेकिन चुनावी हलचल सिर्फ तारीखों तक सीमित नहीं है, बल्कि इस सीट को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ने पूरी ताकत झोंक दी है।

Bilaspur Nagar Chunav: यह वार्ड कांग्रेस का मजबूत गढ़

यह वार्ड लंबे समय से कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे में कांग्रेस जहां अपनी परंपरागत पकड़ बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं भाजपा पहली बार इस सीट पर जीत दर्ज करने की तैयारी में जुट गई है। बता दें कि इस वार्ड में दूसरी बार उपचुनाव हो रहा है। इससे पहले कांग्रेस सरकार के दौरान शेख गफ्फार की मौत के बाद उपचुनाव हुए, जिसमें उनके भाई शेख असलम को कांग्रेस ने टिकट दिया और जीत दर्ज की। अब पूर्व पार्षद शेख असलम के निधन के बाद फिर से उपचुनाव हो रहे हैं। ऐसे में उपजे सहानुभूति फैक्टर को भी कांग्रेस अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश करेगी।

संजय गांधी नगर में चुनावी रण सज गया, दोनों दलों में रणनीतिक घेराबंदी

राजनीतिक मायने

  • कांग्रेस के लिए यह सीट प्रतिष्ठा बचाने की लड़ाई मानी जा रही है।
  • भाजपा इसे शहर में राजनीतिक विस्तार के अवसर के रूप में देख रही है।
  • सहानुभूति, जातीय समीकरण और स्थानीय नेटवर्क चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
  • प्रत्याशी चयन ही दोनों दलों की जीत-हार का सबसे बड़ा फैक्टर माना जा रहा है।

कांग्रेस में जातीय और पारिवारिक समीकरण पर फोकस

कांग्रेस ने चुनाव को गंभीरता से लेते हुए शहर अध्यक्ष सुधांशु मिश्रा के नेतृत्व में 11 सदस्यीय चयन समिति बनाई है। समिति स्थानीय समीकरण, जातीय संतुलन और सहानुभूति वोट को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशी तय करेगी। वार्ड में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अधिक होने के कारण पार्टी फिर से शेख गफ्फार परिवार से जुड़े चेहरे पर दांव खेल सकती है। लेकिन क्रिश्चियन वोटरों को भी दरकिनार नहीं किया जा सकता है।

भाजपा को शहर सरकार का भरोसा

दूसरी तरफ भाजपा नगर निगम में अपनी सत्ता और संगठनात्मक ताकत के दम पर इस बार जीत को लेकर आश्वस्त दिखाई दे रही है। माना जा रहा है कि प्रत्याशी चयन में शहर विधायक अमर अग्रवाल की भूमिका निर्णायक रहेगी। पार्टी की रणनीति कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने और विकास मुद्दों को केंद्र में रखने की है। क्योंकि लंबे समय से इस वार्ड में कांग्रेस का दबदबा है, ऐसे में कांग्रेस का गढ़ ढहाने के लिए भाजपा रणनीति तैयार कर रही है।

Updated on:
13 May 2026 03:41 pm
Published on:
13 May 2026 01:44 pm