बिलासपुर

Bilaspur News: 18 साल पहले हुई जांच में दार्जिलिंग-लंदन की डिग्री निकली फर्जी, अपोलो प्रबंधन और IMA ने दबाया था केस

Bilaspur News: इस मामले में सीेएमएचओ डॉ. प्रमोद तिवारी ने अपोलो अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी किया है। उन्होंने जवाब मांगा है कि किस आधार पर डॉक्टर की नियुक्ति की गई थी। उसकी डिग्रियां सहित अन्य दस्तावेज पेश करने कहा है।

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Bilaspur News: दमोह के मिशन अस्पताल में 7 मरीजों की मौत का आरोपी फर्जी डॉ. नरेन्द्र ने 2006 में बिलासपुर अपोलो में कार्यरत था। तब उसके इलाज के दौरान जब हार्ट पेशेंट की लगातार मौतें हुई तो अपोलो प्रबंधन ने जांच टीम गठित की थी। जिसमें कार्डियोलाजिस्ट वायएस दुबे और आईएमए के तत्कालीन स्टेट प्रेसिडेंट डॉ. किरण एस. देवरस शामिल थे।

Bilaspur News: डॉ. नरेन्द्र को दार्जिलिंग में नहीं मिला था एडमिशन

डॉ. किरण एस. देवरस ने उन दिनों को याद करते हुए बताया कि जब कमेटी ने जांच के दौरान डॉ. नरेन्द्र से डिग्री मांगी तो वह दस्तावेज पेश नहीं कर सका। पूछताछ में डॉ. नरेन्द्र जॉन ने पहले दार्जिलिंग और फिर लंदन से अपनी डिग्री और स्पेशलिस्ट होने की जानकारी दी, लेकिन वेरिफिकेशन में पता चला कि उनको दार्जिलिंग में एडमिशन ही नहीं मिला था।

लंदन की डिग्री की जांच के लिए अपोलो सीईओ ने मेल से जानकारी मांगी तो वहां से जवाब आया कि इस नाम के किसी शख्स ने यह डिग्री नहीं ली है। हमने इसे फर्जी डॉक्टर बताते हुए यहां नहीं रखने की सलाह दी थी।

डॉ. देवरस ने बताया कि डॉ. नरेन्द्र की डिग्री फर्जी होने की जानकारी अपोलो अस्पताल प्रबंधन को दी थी। अपोलो अस्पताल प्रबंधन ने स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी दी या नहीं, पता नहीं। आरोपी डॉक्टर की यह करतूत झोलाछाप डॉक्टर से भी ज्यादा खतरनाक है।

सीएमएचओ ने बिलासपुर अपोलो को दिया है नोटिस

Bilaspur News: इस मामले में सीेएमएचओ डॉ. प्रमोद तिवारी ने अपोलो अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी किया है। उन्होंने जवाब मांगा है कि किस आधार पर डॉक्टर की नियुक्ति की गई थी। उसकी डिग्रियां सहित अन्य दस्तावेज पेश करने कहा है। साथ ही पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सहित कई लोगों की मौत के मामले में डॉक्टर के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई थी। ये जानकारी मांगी गई है।

Published on:
11 Apr 2025 09:07 am
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