
Bilaspur High Court(photo-patrika)
CG High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य मानसिक चिकित्सालय, सेंदरी (बिलासपुर) में मनोचिकित्सकों की भर्ती को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के हलफनामे को अपर्याप्त मानते हुए कड़ी टिप्पणी की है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव को निर्देश दिया है कि वे 24 मार्च 2026 तक ताजा और विस्तृत हलफनामा दाखिल करें।
सुनवाई में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया कि 12 जनवरी 2026 के आदेश के अनुपालन में जो व्यक्तिगत हलफनामा दायर किया गया है, उसमें मनोचिकित्सक पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया, उसका समय-सीमा, आवेदन आमंत्रण, साक्षात्कार की संभावित तिथि तथा भर्ती में आ रही व्यावहारिक चुनौतियों और उन्हें दूर करने के उपायों का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के सचिव द्वारा दायर हलफनामे में बताया गया कि मनोचिकित्सक पदों के लिए 22 अप्रैल 2025 को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के माध्यम से विज्ञापन जारी किया गया था, किंतु दस्तावेज सत्यापन के दौरान सभी अभ्यर्थी या तो अनुपस्थित पाए गए या अयोग्य निकले। इसके चलते किसी भी अभ्यर्थी को साक्षात्कार के लिए शॉर्टलिस्ट नहीं किया जा सका और भर्ती प्रक्रिया स्थगित करनी पड़ी।
इन तथ्यों के बावजूद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मनोचिकित्सक पदों पर नियमित भर्ती के संबंध में सरकार द्वारा ठोस और समयबद्ध कार्ययोजना प्रस्तुत नहीं की गई है, जो 12 जनवरी 2026 के आदेश की भावना के अनुरूप हो। अदालत ने कहा कि केवल अंतरिम व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्थायी समाधान आवश्यक है। कोर्ट ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव को निर्देशित किया कि वे मनोचिकित्सक पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया की पूरी रूपरेखा के साथ ताजा हलफनामा 24 मार्च 2026 तक दाखिल करें। मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च को निर्धारित की गई है।
Updated on:
05 Feb 2026 09:53 am
Published on:
05 Feb 2026 09:53 am
