शैलेंद्र पाण्डेय/बिलासपुर.
अरपा नदी को लंदन के टेम्स नदी की तर्ज पर विकसित करने का सपना देखकर अरबों रुपए का अरपा प्रोजेक्ट और अरपा डायवर्सन प्रोजेक्ट तैयार किया गया। लेकिन हाल ये कि यहां कचरा और मलबा डंपिंग तक नहीं रोक पा रहे हैं। सीवरेज की खुदाई से निकले मलबे और शहर भर के कचरे से आधी नदी को पाट डाला।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश और पर्यावरण संरक्षण का हवाला देकर गरीब मूर्तिकारों से प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां जब्त करने वाला निगम प्रशासन खुद एनजीटी के निर्देशों की धज्जियां उड़ा रहा है। ग्रीन ट्रिब्यूनल वर्ष 2015 से नगरीय निकायों को लगातार आदेश जारी कर चेतावनी दे रहा है कि वे नदी, तालाब या अन्य जलस्रोतों के आसपास कचरा और मलबा डंंप न कराएं। लेकिन निगम प्रशासन और सीवरेज के ठेकेदारों ने उसी अरपा नदी को कचरे और मलबे से पाट डाला, जिसे नगरीय प्रशासन मंत्री ने लंदन की टेम्स नदी की तर्ज पर विकसित करने का सपना देखा था। इसके लिए 18 अरब 58 करोड़ की योजना बनाई गई है। हालाकि यह योजना अभी तक कागज पर ही चल रही है, जिसमें करोड़ों रुपए खर्च
इस योजना के तहत नदी में देवरीखुर्द से लेकर कुदुदंड तक 24 करोड़ की लागत से छह एनीकट बनाए जाने थे। गंदे पानी को नाला बनाकर बाहर ही बाहर दोमुहानी के आगे ले जाया जाना था। लेकिन योजना ठप पड़ गई। एनीकट का आज तक अता-पता नहीं है। फाइल धूल खा रही है।
संयुक्त छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री पंडित श्यामाचरण शुक्ल और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ श्रीधर मिश्रा ने सन् 1975-76 में अरपा नदी में बारहों माह जलभराव सुनिश्चित कराने के लिए अरपा डायवर्सन योजना बनाकर इसके लिए सवा करोड़ रुपए स्वीकृत कराए थे। योजना के तहत बिल्हा ब्लाक के 28-30 गांवों तक नहर बनाकर सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति की जानी थी। 27 साल बाद वर्ष 2002-03 में फिर इसके लिए प्लानिंग की गई। तत्कालीन कलेक्टर आरपी मंडल और अरपा विकास समिति के अध्यक्ष सैय्यद जफर अली के आव्हान पर जनसमूह ने यहां बहती नदी को रेत की बोरियां डालकर श्रमदान करके बांधा। इसी बांध के पास देवरीखुर्द बरखदान में 2003 में चेकडेम बनकर तैयार हुआ।
यहां देखे जा सकते हैं मलबे व कचरे के ढेर :
अरबों की योजना बनाने वाले निगम के स्वास्थ्य महकमे ने जूना बिलासपुर पचरीघाट पर चौपाटी से लगे नदी तट पर कचरा और मलबा डाल रखा है। इसके अलावा दयालबंद मधुबन, तोरवा पुल के नीचे, गोड़पारा आर्य समाज मंदिर के सामने आधी नदी तक और कुदुदंड घाट समेत शहर के अन्य घाटों पर कचरे और मलबे के ढेर आधी नदी तक देखे जा सकते हैं।
हर बार चुनाव के ठीक पहले अरपा प्रोजेक्ट को लेकर सक्रियता दिखाने वाले नगरीय प्रशासन मंत्री और निगम प्रशासन इस बार इसे लेकर मौन हैं। वर्ष 2007-08 से अरपा प्रोजेक्ट का प्रस्ताव निगम के हर बजट पुस्तिका में शामिल किया जाता रहा है, लेकिन पिछले साल -दो साल से इस प्रोजेक्ट को किनारे कर सभी ने मौन साध रखा है। इससे लगता है कि मिशन 2018 के चुनावी घोषणा पत्र से अरपा प्रोजेक्ट गायब रहेगा।
बदहाली के लिए शासन और प्रशासन जिम्मेदार :
भाजपा शासन काल को 14 साल हो गए, हम जो कर सकते थे किया। उसके बाद आज तक एक ईट नहीं लगी। अरपा नदी के तट पर कचरा और मलबा डंप किया जा रहा है। इसकी बदहाली के लिए शासन और प्रशासन जिम्मेदार है। केवल योजना बनाने से कुछ नहीं होगा, अच्छी भावना से क्रियान्वयन भी कराना होगा।
अध्यक्ष, अरपा विकास समिति
हम राजनीतिक दल के नेता हैं जो कर सकते हैं किया और आगे भी करेंगे। लेकिन जीवनदायनी अंत: सलिला अरपा मैया का मामला है आमजन को भी जुडऩा होगा। कचरा मलबा डालकर पूरी नदी को बर्बाद कर दिया गया। इसके लिए मंत्री और निगम प्रशासन जिम्मेदार हैं, जनजागरण कर लोगों को जोड़ा जाएगा।
पूर्व सचिव, प्रदेश कांग्रेस कमेटी
सफाई और कचरे के संपूर्ण निदान कार्य किया जा रहा है :
निगम प्रशासन द्वारा सफाई और कचरे के संपूर्ण निदान का कार्य धीरे- धीरे प्लान बनाकर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन करने वाली कंपनी को सौंंपा जा रहा है। पूरी तरह योजना लागू होने के बाद नदी तट पर कचरा-मलबा डलवाना बंद कर दिया जाएगा। अभी प्रारंभिक तौर पर 20 वार्डों में घरों-घर कचरा संकलन कार्य प्रारंभ कराया गया है।