
बिलासपुर. जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जकांछ) और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन ने मंगलवार को सीटे तय कर दीं। जिले की एकमात्र सीट मस्तूरी में बसपा हालांकि हमेशा की तीसरे नंबर पर रही लेकिन उसका वोट प्रतिशत बेहतर रहा है। 2008 में तो बसपा को 29 हजार 293 वोट मिले थे। लेकिन मस्तूरी में पिछली बार 24 हजार वोट से जीतने वाले दिलीप लहरिया और भाजपा के वोट प्रतिशत कम कर अपने लिए वोट जुटाने की चुनौती बसपा के सामने रहेगी। विधानसभा चुनाव के लिए जनता कांग्रेस छत्तीसगढ जोगी (जकांछ) और बहुजन समाज पार्टी के बीच सीटों का बंटवारा मंगलवार को कर दिया गया।
इसमें प्रदेश की 90 सीटों में से 55 पर जकांछ और 35 पर बसपा चुनाव लड़ेगी। बिलासपुर संभाग से 16 सीट बसपा को दी गई हैं, इनमें अविभाजित बिलासपुर जिले की 9 सीट में से एकमात्र मस्तूरी सीट बसपा के हिस्से आई है। मस्तूरी से जकांछ सुप्रीमो अजीत जोगी की बहू ऋचा जोगी और युवा नेता राजेश्वर भार्गव व लक्ष्मी भार्गव सक्रिय थे। राजेश्वर व लक्ष्मी भार्गव ने तो क्षेत्र में संपर्क और जकांछ के लिए वोट मांगने भी शुरू कर दिए थे, लेकिन अब इनके चुनाव लडऩे पर विराम लग गया है।
जांजगीर-चांपा की सभी सीटें बसपा को : बंटवारें के तहत बसपा को जांजगीर चांपा जिले में सर्वाधिक 6 सीट मिलीं। अजा बाहुल्य होने के मद्देनजर वहां की सभी सीट बसपा को दी गई हैं। बंटवारे के अनुसार बिलासपुर व सरगुजा संभाग में बिलासपुर से मस्तूरी, कोरिया से भरतपुर सोनहत, बलरामपुर जिले की सामरी, अंबिकपुर में लोकल अंबिकापुर व लुण्ड्रा, जशपुर में जशपुर व कुनकुरी, जांजगीर चांपा जिले की जांजगीर, अकलतरा, सक्ती, जैजैपुर, पामगढ़, चंद्रपुर सीट शामिल हैं। इसी तरह रायगढ़ जिले की सारंगढ़ व खरसिया, कोरबा जिले की पाली तानाखार सीट पर बसपा चुनाव लड़ेगी।
तीन चुनावों में तीसरे नंबर पर रही बसपा : छत्तीसगढ़ बनने के बाद 2003 से पिछले चुनाव तक बसपा यहां लगातार तीसरे नंबर पर रही है। 2003 में भाजपा प्रत्याशी कृष्णमूर्ति बांधी 2 हजार 268 वोट के मामूमली अंतर से जीते थे। भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए मस्तूरी के ही पूर्व विधायक मदनसिंह डहरिया को उन्होंने हराया था। बसपा को 11 हजार 948 वोट मिले। 2008 में भी भाजपा के कृष्णमूर्ति बांधी और कांग्रेस से मदनसिंह डहरिया का मुकाबला था और इस बार भी बांधी की जीत हुई। उन्होंने डहरिया को 9 हजार 908 वोटों से हराया। इस बार बसपा प्रत्याशी को 29 हजार 293 वोट मिले। 2013 में भी भाजपा की ओर से कृष्णमूर्ति बांधी प्रत्याशी थे लेकिन कांग्रेस ने रणनीति बदली और यहां से उस समय के जोगी समर्थक दिलीप लहरिया को टिकट दी। इस बार कांग्रेस 24 हजार वोट से भाजपा को हराने में सफल रही। लहरिया को 84 हजार बांधी को 60 हजार वोट मिले। बसपा इस बार भी 11 हजार 95 वोट पाकर तीसरे नंबर रही।
जोगी ने बनाई थी लहरिया के लिए लहर : मस्तूरी में पिछली बार भाजपा से सीट छीनने में कांग्रेस की कामयाबी के पीछे यहां अजीत जोगी परिवार को सक्रिय रहना भी माना जाता है। दिलीप लहरिया नौसिखिए थे और अमित ने न सिर्फ उनको टिकट दिलवाया बल्कि जिताने के लिए आर्थिक मदद के साथ ताकत भी झोंकी। यहां पर अजीत व अमित जोगी लगातार सक्रिय रहे। बसपा से मस्तूरी में 2003 में लक्ष्मी भार्गव, 2008 में सीपत से विधायक रह चुके इंजीनियर रामेश्वर खरे और 2013 में पीआर जोशी प्रत्याशी थे। हालांकि जीत नहीं मिल पाई।