कांग्रेसियों का कहना है कि एक साथ हजारों लोगों के नाम कट जाने के पीछे साजिश हो सकती है। इसकी जांच करानी चाहिए।
बिलासपुर. जिले के सभी सातों विधानसभा में नाम विलोपित होने के कारण अधिकांश लोग मतदान करने से वंचित रह गए। तमाम लोगों को मतदान स्थल से वापस लौटना पड़ा। लोग नाम कटने की दिनभर शिकायतें करते रहे, लेकिन इनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। जिले में हजारों लोग मतदान करने से वंचित रह गए। कांग्रेसियों का कहना है कि एक साथ हजारों लोगों के नाम कट जाने के पीछे साजिश हो सकती है। इसकी जांच करानी चाहिए।
जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा नाम जुड़वाने के लिए जगह- जगह शिविर लगाए गए। लोगों ने थोक में आवेदन भी जमा किए थे। लेकिन मतदान के दिन एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई। जिसको लेकर जिले भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। हर विधानसभा से मतदाताओं के नाम कटने की शिकायत सुबह से मिल रही थी। पति-पत्नी का नाम अलग-अलग वार्ड में कर दिया गया है। एक साथ परिवार में रहने वालों का नाम अलग-अलग वार्ड में दिखाया गया। हालत यह हो गयी जो दूसरे शहर से वोटिंग करने के लिए आए थे उनको बिना मतदान किए वापस लौटना पड़ा। जिले में सबसे ज्यादा बिलासपुर विधानसभा से नाम कटने और दूसरे वार्ड में जाने की शिकायत मिल रही है।
साहित्यकार सतीश भी तमतमाए : नाम कटने वालों की फेहरिश्त में पीढिय़ों से बिलासपुर के बृहस्पति बाजार में रहे साहित्यकार सतीश जायसवाल भी शामिल रहे। उन्होंने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है। हम इसके लिए चुप नहीं बैठेंगे। यह सरासर साजिश है।
केस-1 : अफसर भी नहीं दे पाए संतोषप्रद जवाब : वार्ड क्रमांक 13 में मोहसिना के नाम नहीं था। 40 वर्षीय मोहसिना ने बताया एक बार नाम कटने की जानकारी मिली थी तब नाम जोडऩे के लिए आवेदन किया था। इसके बावजूद नाम नहीं आया है। अधिकारियों ने इस मामले में किसी प्रकार का जवाब नहीं दिया है।
केस-2 : इसे लापरवाही कहें या फिर साजिश : नर्मदा नगर वार्ड क्रमांक तीन के पिंकी सराफ रायपुर से मतदान करने के लिए आई थी। मतदान करने के लिए मुंगेली नाका स्थित शेफर्ड स्कूल पहुंची तो उनका नाम नहीं था। पिंकी ने पत्रिका को बताया इससे पहले वे मतदान कर चुकी है लेकिन इस बार उनका नाम नहीं आया।
केस-3 :मतदान नहीं करने का मलाल : अभिषेक मिश्रा ने बताया उनके परिवार के चार लोगों का नाम नहीं है, जबकि वे पिछली विधानसभा और नगर निगम चुनाव में मतदान किया था। नाम कटने को लेकर अधिकारियों से संपर्क किया लेकिन इस मामले में अधिकारियों से स्पष्ट जवाब नहीं मिला। अभिषेक ने बताया सरकण्डा क्षेत्र के चार वार्ड में अपना ढंूढा लेकिन किसी में नहीं था। नाम नहीं होने के कारण वे इस बार वोट नहीं कर पाए और न ही उनके परिवार के लोगों ने वोटिंग किया।