CG News: एक स्कूल भवन के लिए लगभग 60 लाख रुपए की स्वीकृति दी गई थी। प्रिंसिपल के अलावा 6 शिक्षकों का सेटअप है। लेकिन क्लर्क और चतुर्थ वर्ग कर्मी नहीं हैं।
Peons Jobs: राज्य के स्कूलों में भृत्य और अन्य चतुर्थ वर्ग कर्मियों की कमी के मामले में हाईकोर्ट स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की है। मामले में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। सचिव स्कूल शिक्षा के शपथपत्र में केंद्र सरकार द्वारा राज्य को स्वीकृत किए गए फंड के संबंध में कोई जानकारी नहीं थी। चीफ जस्टिस की डीबी ने इस पर सवाल किया तो महाधिवक्ता के अनुरोध पर शासन को 3 सप्ताह का समय जवाब देने के लिए दिया गया है।
प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में चपरासी के 1009 पद स्वीकृत हैं। इनमें 541 स्कूलों में चपरासियों की नियुक्ति की गई है, लेकिन 468 पद अभी भी रिक्त हैं। जिले सहित प्रदेश में अधिकांश जगहों पर प्राइमरी, मिडिल और आरएमएसए के स्कूल एक ही परिसर में है। लेकिन आरएमएसए में कोई नियुक्ति नहीं है। कुछ आरएमएसए के स्कूलों में प्राइमरी, मिडिल स्कूलों में पदस्थ चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी सफाई कर देते हैं लेकिन अधिकांश जगहों पर ऐसा नहीं होता।
ज्ञात हो कि आरएमएसए के तहत बिलासपुर में 98 तो गौरेला पेंड्रा मरवाही में 19 स्कूल खोले गए। एक भवन में तीन कमरे और एक स्टाफ रूम की व्यवस्था है। एक स्कूल भवन के लिए लगभग 60 लाख रुपए की स्वीकृति दी गई थी। प्रिंसिपल के अलावा 6 शिक्षकों का सेटअप है। लेकिन क्लर्क और चतुर्थ वर्ग कर्मी नहीं हैं।