बिलासपुर

जेलों में कैदियों की पिटाई और वसूली पर हाईकोर्ट सख्त, शासन से मांगी विस्तृत रिपोर्ट, 19 कर्मियों पर कार्रवाई जारी

High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सारंगढ़ उपजेल में कैदी से दुव्र्य वहार और अवैध गतिविधियों के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए प्रदेश सरकार और जेल विभाग से कार्रवाई की प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
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हाईकोर्ट (photo-patrika)
हाईकोर्ट (photo-patrika)

Bilaspur High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सारंगढ़ उपजेल में कैदी से दुर्व्यवहार और अवैध गतिविधियों के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए प्रदेश सरकार और जेल विभाग से कार्रवाई की प्रगति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

इसके साथ ही दुर्ग जेल में कैदी की पिटाई और वसूली के मामले में क्या कार्रवाई की जा रही है,इस पर भी जेल विभाग से शपथ पत्र देने कहा गया है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से बताया गया कि 19 कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है। इस पर कोर्ट ने जेलों में सुधार के लिए शासन की ओर से उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी एक बार फिर से शपथ पत्र में मांगी है।

कार्रवाई की जानकारी दी शासन ने

उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने इस मामले की जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की है। इससे पहले कोर्ट ने जेल कर्मियों पर हुई विभागीय जांच और कार्रवाई पर संतोषजनक जानकारी नहीं मिलने पर नाराजगी जताई थी। सरकार की ओर से उपमहाधिवक्ता ने बताया कि मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई है। मामले में अब तक 10 में से 3 जेल कर्मियों की जांच पूरी कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है, जबकि, 7 अन्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

कैदियों से वसूली और दुर्व्यवहार

सारंगढ़ उपजेल में कैदी से टॉर्चर और वसूली की घटनाओं की शिकायतें सामने आईं। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जेल प्रशासन की अनियमितताओं के कारण बंदियों के साथ दुर्व्यवहार, मारपीट, अवैध वसूली आम हो गई है।पिछली सुनवाई में कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं और उनके परिजनों राहत देते हुए जांच अधिकारी को निर्देश दिया था कि उनके बयान बिलासपुर में ही लिए जाएं, ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।

जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदी

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य की जेलों की भयावह भीड़भाड़ और वेलफेयर अधिकारियों की कमी को लेकर गहरी चिंता जताई है। कोर्ट ने राज्य सरकार और जेल महानिदेशक को स्पष्ट निर्देश दिए कि जेल व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं। कोर्ट का रुख बेहद सख्त नजर आया, क्योंकि जेलों में कैदियों की संख्या क्षमता से 40 प्रतिशत से अधिक है, जो सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा है।

Updated on:
28 Feb 2026 08:35 am
Published on:
28 Feb 2026 08:35 am