
Chhattisgarh High Court: आंधी-तूफान और बारिश के दौरान बिलासपुर की सड़कों पर जलभराव और लगातार बिजली कटौती के मुद्दे पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि केवल कार्ययोजना बना लेना काफी नहीं है, जब तक उसका लाभ आम जनता को जमीन पर न मिले, लेकिन इन दिशा निर्देशों का कोई असर निगम और प्रशासन के अफसरों पर नहीं दिख रहा।
शुक्रवार को शहर की बदहाली पूरी तरह उजागर हो गई जब शहर जलमग्न होने के साथ बिजली भी दिन भर गुल रही। चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने 8 जुलाई को सुनवाई में ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव, बिजली कंपनी के एमडी और बिलासपुर नगर निगम आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने और 30 जुलाई 2026 तक ठोस प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
निगम कमिश्नर की ओर से दिए शपथपत्र में नेहरू चौक स्थित विकास भवन में समर्पित कंट्रोल रूम गठित कर नोडल अधिकारी तैनात करने,अप्रैल 2026 से सभी 8 जोनों में प्रमुख नालों और नालियों की गाद निकालने का काम जारी होने की जानकारी दी गई। जलभराव से निपटने के लिए जेसीबी, पंप और राहत सामग्री के प्रबंध की बात भी उन्होंने कही।
निगम के एक अधिकारी के अनुसार केवल रिकॉर्ड बारिश ही वजह नहीं, शहर में जलभराव के पीछे और भी कारण हैं, जिनमें प्रमुख ये हैं