High Court: हाईकोर्ट ने साफ किया कि यह नौकरी किसी व्यक्ति का निजी अधिकार या विरासत नहीं, बल्कि पूरे परिवार को आर्थिक संकट से उबारने का माध्यम है।
Bilaspur High Court: अनुकंपा नियुक्ति और पारिवारिक दायित्व पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई व्यक्तिगत उपहार या विरासत में मिली संपत्ति नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार को आर्थिक संकट से उबारने के लिए दी जाने वाली सहायता है।
कोर्ट ने बहू को चेतावनी दी है कि अगर उसने अपनी आश्रित सास का भरण-पोषण नहीं किया तो उसकी नियुक्ति रद्द कर दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि पति की मौत के बाद पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। लेकिन वह अपनी सास का भरण पोषण नहीं कर रही थी।
प्रकरण के अनुसार अंबिकापुर निवासी ज्ञांती तिवारी पति और बेटे की मौत के बाद दाने-दाने को मोहताज हो गई। पति घनश्याम तिवारी पुलिस विभाग में कॉन्स्टेबल थे। 2001 में उनकी मौत हो गई। इसके बाद बेटे अविनाश तिवारी को अनुकंपा नियुक्ति मिली, जिससे मां को सहारा मिला। इस बीच अविनाश की शादी नेहा तिवारी से हुई और दिसंबर 2021 में अविनाश की भी मौत हो गई। अविनाश की जगह उसकी पत्नी नेहा को अनुकंपा नियुक्ति मिली। नौकरी मिलते ही सास के प्रति उसका व्यवहार बदल गया। उसने सास के साथ दुर्व्यवहार करना शुरू कर दिया।
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि बहू ने नियुक्ति के समय शपथ-पत्र दिया था कि वह सास की देखभाल करेगी। कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति मृतक के पूरे परिवार को सुरक्षा देने के लिए है। क्योंकि बहू ने अपने पति की जगह नौकरी पाई है, इसलिए उस पर वही कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी लागू होती है, जो उसके पति पर अपनी मां के प्रति थी। सरकार की नीति के अनुसार यदि कोई कर्मचारी अपने आश्रितों के भरण-पोषण के वादे से मुकरता है, तो उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है।
बहू के व्यवहार से परेशान होकर ज्ञांती तिवारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि राज्य शासन ने बेटे की मौत के बाद बहू नेहा तिवारी को इस शर्त पर अनुकंपा नियुक्ति दी कि वह सास की पूरी देखभाल और भरण-पोषण करेगी।याचिका में आरोप लगाया कि बहू उसके साथ परायों की तरह व्यवहार करती है। याचिका में मांग की गई कि बहू नेहा तिवारी को 8 मार्च 2022 को जारी नियुक्ति आदेश को निरस्त किया जाए। बहू की जगह उनकी अविवाहित बेटी प्रीति तिवारी को अनुकंपा नियुक्ति देने पर विचार करने के निर्देश कोर्ट जारी करे।