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CG High Court: हसदेव अरण्य केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, रिट अपील खारिज, सिंगल जज का आदेश बरकरार

High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हसदेव अरण्य मामले में अहम फैसला सुनाते हुए पर्यावरण संरक्षण को लेकर दायर रिट अपील को खारिज कर दिया है।

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हाईकोर्ट (photo-patrika)

हाईकोर्ट (photo-patrika)

CG High Court: बिलासपुर हाईकोर्ट ने हसदेव अरण्य क्षेत्र को बचाने के लिए दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील को निरस्त कर दिया।

डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि आर्थिक मुआवजा पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता, भले ही यह विचार सैद्धांतिक रूप से आकर्षक लगे। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि जब भूमि अधिग्रहण और वन डायवर्जन के लिए विधिवत कानूनी मंजूरी मिल चुकी हो और परियोजना पर लंबे समय से काम चल रहा हो, तब न्यायालय उस स्थापित कानूनी ढांचे को दरकिनार नहीं कर सकता।

याचिका में खामियां गिनाईं

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि अपीलकर्ताओं ने याचिका दायर करने में देरी की। जरूरी तथ्यों को पूर्ण रूप से प्रस्तुत नहीं किया। मूल आदेशों को चुनौती नहीं दी, साथ ही कोर्ट ने यह भी माना कि उठाए गए मुद्दे पहले के बाध्यकारी निर्णयों से पहले ही तय हो चुके हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फॉरेस्ट राइट्स एक्ट 2006 के तहत भी इस स्तर पर पहले से दी गई माइनिंग और फॉरेस्ट डायवर्जन की मंजूरी को रद्द करने का आधार नहीं बनता। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने कहा कि 8 अक्टूबर 2025 को दिए गए सिंगल जज के फैसले को रद्द करना उचित नहीं होगा। नतीजतन, रिट अपील को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया गया।

पर्यावरण-जनहित में संतुलन जरूरी

कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका को पर्यावरणीय चिंताओं के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए, लेकिन साथ ही प्रतिस्पर्धी जनहितों के बीच संतुलन बनाना भी जरूरी है, खासकर तब जब परियोजनाएं काफी हद तक पूरी हो चुकी हों और उनमें व्यापक सार्वजनिक उपयोगिता जुड़ी हो। बेंच ने माना कि सिंगल जज ने तथ्यों और कानून की स्थिति का सही आकलन किया था, इसलिए उनके आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता।

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