Chhattisgarh news: मीटर रीडर के धरने पर जाने से रीडिंग बंद हो गई है। उपभोक्ताओं की परेशानी यह है कि यदि समय पर रीडिंग नहीं हुई तो खपत का स्लैब बढ़ जाएगा, ऐसे में बिना वजह ज्यादा पैसे चुकाने पड़ेंगे।
Bilaspur news: बिलासपुर के अधिकारियों ने कहा कि रीडर मीटर रीडिंग नहीं करते हैं तो वैक्ल्पिक व्यवस्था के रूप में लाइऩ मैन इस कार्य को कर सकते हैं। घरों की मीटर रीडिंग एक 1 तारीख से शुरू हो जाती है, लेकिन इस माह मीटर रीडर ही एक मई से धरने पर हैं। इस वजह से अभी मीटर रीडिंग शुरू नहीं हो पाई है। बता दें कि जिले में 88 मीटर रीडर हैं। वहीं 1 लाख 35 हजार 812 कनेक्शन धारी हैं। इसके अलावा 4 हजार पॉवर कनेशक्शन हैं, जिसको विभाग देखता है।
फिलहाल उपभोक्ता परेशान हो रहे हैं, क्योंकि इस माह रीडिंग नहीं हुई है। ऐसे में उन्हें भय है कि स्लैब बढ़ जाएगा, जिसके कारण उपभोक्ताओं को बिजली बिल का अधिक रुपए भुगतान करना पड़ेगा।
ऐसे समझें इसे
स्लैब बढ़ने का अर्थ यह है कि यदि इस माह बिलिंग नहीं हुई तो अगले माह एक साथ दो माह की बिलिंग होगी, जबकि स्लैब के हिसाब से प्रतियूनिट बिजली का दर निर्धारित है। दो माह की बिलिंग में यूनिट ज्यादा होगा, इसके कारण स्लैब बढ़ जाएगा और स्लैब बढ़ेगा तो बिजली की दर भी बढ़ जाएगी।
मौखिक मिला आश्वासन, संघ इससे असंतोष
ज्ञापन देने पहुंचे मीटरी रीडर संघ से एमडी ने मुलाकात ही नहीं की। इसके एवज में संघ से दूसरे-दूसरे अधिकारी मिले। इस संबंध में अधिकारी ने कहा कि अधिकारियों से चर्चा कर कमेटी गठित की जाएगी। इस तरह का मौखिक आश्वासन दिया गया। इससे संघ के पदाधिकारी और कर्मचरी न खुश नजर आए। उऩ्होंने कहा कि आगे पदाधिकारियों के साथ बैठकर रणनीति तैयार की जाएगी। फिलहाल मांग पूरी नहीं होने पर धरना जारी रहेगा। जिला अध्यक्ष प्रवेश जोगी का कहना है कि स्टार्ट मीटर आने से उनकी नौकरी खतरे में है। इससे हजारों की संख्या में प्रदेश भर के कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे। उनके घरों में आर्थिक संकट पैदा हो जाएगा। उनकी मांग है कि स्टार्म मीटर न लगाया जाए। साथ ही कहा कि अल्पकालीन न करके पूरे माह में काम देने, रेगुलर व संविदा में करने समेत 4 सूत्रीय मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा है।
वैक्ल्पिक व्यवस्था के रूप में लाइन मैन करेंगे काम...
बिजली विभाग के सर्किल हेड अधिकारी ने कहा कि रीडर मीटर रीडिंग नहीं करते हैं तो वैक्ल्पिक व्यवस्था के रूप में 108 लाइन मैन जो कि मीटर रीडिंग का भी काम कर सकते हैं, लेकिन लाइन मैन वर्षों से रीडिंग नहीं किए हैं। इसकी वजह से विभाग को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं सारे गैजेट भी ठेका कर्मियों और ठेकेदार के पास ही है। इससे विभाग को फिर से मीटर रीडिंग के लिए कोई दूसरी व्यवस्था बनानी होगी।
स्मार्ट मीटर जीपीएस सर्वे की चल रही तैयारी
स्मार्ट मीटर लगाने के लिए लाइन लॉस के काम को चिन्हित करके विभाग के कर्मचारियों ने रिपोर्ट प्रोजेक्ट डिवीजन तो सौंप दिया गया। इसके लिए अलग-अलग एजेंसी की के 4-4 लोग अब जीपीएस सर्वे कर रहे हैं। मशीन के माध्यम से अक्षांश और देशांतर देखा जाएगा। इसके बाद मशीन में उसे पुटअप किया जाएगा, जिसके बात प्लान तैयार कर सर्वे कर लिया जाएगा। सर्वे के अनुसार ही आगे का काम शुरू किया जाएगा।
मोर बिजली एप भी विकल्प...
हैरान करने वाली बात यह है कि रीडरों के हड़ताल के बाद अधिकारी वैकल्पिक व्यवस्था करने की बात कर रहे हैं पर ये नहीं बता रहे हैं कि मोर बिजली एप में भी इसके लिए ऑप्शन मौजूद है, जिसके तहत उपभोक्ता अपने मीटर की खपत की फोटो खींचकर विभाग को भेज सकता है। हालांकि एक कारण यह भी है कि इस एप में बिजली बिल अपलोड होना और भुगतान के अलावा अन्य दिए गए सुविधाओं पर विभाग गौर नहीं करता है।
रीडर धरने पर हैं लेकिन हमारे पास वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर लाइनमैन रीडिंग करेंगे। अगर रीडर धरना खत्म कर वापस आ जाते हैं तो कोई समस्या नहीं होगी। आगे उच्च अधिकारियों के आदेश पर कार्य किया जाएगा।
बीपी जायसवाल, सर्किल हेड, बिजली विभाग