बिलासपुर

दुर्ग संभाग में शिक्षक प्रमोशन पर TET का पेंच, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नहीं लगाई रोक, जानिए पूरा मामला?

Chhattisgarh Teacher Promotion: TET और प्रमोशन विवाद हाई कोर्ट पहुंच गया है। शिक्षकों की याचिका पर कोर्ट ने प्रमोशन प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई, लेकिन पदोन्नतियों को अंतिम फैसले के अधीन किया है।
3 min read
TET Promotion Controversy
शिक्षकों की याचिका पर कोर्ट ने दिया बड़ा आदेश (Photo Source- Patrika)

TET Promotion Controversy: छत्तीसगढ़ में प्राथमिक शिक्षकों के प्रमोशन में TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता को लेकर चल रहा विवाद अब हाई कोर्ट पहुंच गया है। प्राथमिक स्तर की TET यानी पेपर-1 पास नहीं करने के आधार पर शिक्षक (ई-कैडर) पद पर प्रमोशन की पात्रता से बाहर किए जाने को लेकर आधा दर्जन शिक्षकों ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ताओं अमित शर्मा व अन्य ने शिक्षा विभाग की ओर से 24 अगस्त 2026 को जारी पत्र को चुनौती दी है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सिर्फ TET प्राथमिक स्तर यानी पेपर-1 पास नहीं होने के आधार पर उन्हें शिक्षक (ई-कैडर) पद पर प्रमोशन की प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने हाई कोर्ट से संबंधित अधिकारियों को उनकी उम्मीदवारी पर विचार करने का निर्देश देने और 24 अगस्त के पत्र को निरस्त करने की मांग की है।

TET and promotion controversy: प्रमोशन प्रक्रिया शुरू होने के बाद उठाया मामला

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता ईशान सलूजा ने कोर्ट को बताया कि दुर्ग संभाग के संभागीय संयुक्त संचालक, शिक्षा की ओर से प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके तहत पात्र शिक्षकों से संबंधित जरूरी जानकारी भी मांगी गई है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट के सामने आशंका जताई कि अगर हाई कोर्ट में मामला लंबित रहने के दौरान प्रमोशन की पूरी प्रक्रिया कर दी गई, तो बाद में उनके पक्ष में फैसला आने पर भी उन्हें प्रभावी राहत मिलना मुश्किल हो सकता है। इसी आधार पर उन्होंने अंतरिम राहत देने की मांग की।

शिक्षकों की मांग- TET के आधार पर न रोका जाए प्रमोशन

याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में कहा है कि उन्हें केवल इस वजह से प्रमोशन की दौड़ से बाहर नहीं किया जाना चाहिए कि उन्होंने प्राथमिक TET का पेपर-1 पास नहीं किया है। उन्होंने मांग की है कि शिक्षक (ई-कैडर) पद पर प्रमोशन के लिए उनकी पात्रता और उम्मीदवारी पर भी विचार किया जाए। यह मामला ऐसे समय में हाई कोर्ट पहुंचा है, जब दुर्ग संभाग में प्राथमिक शिक्षकों की पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। ऐसे में कोर्ट के अंतरिम आदेश से प्रमोशन प्रक्रिया पर फिलहाल सीधी रोक तो नहीं लगी है, लेकिन इस प्रक्रिया में होने वाली पदोन्नतियों पर हाई कोर्ट के अंतिम फैसले का असर पड़ सकता है।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

मामले में राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता सुयशधर बड़गैया ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने फिलहाल प्रमोशन प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार किया है। हालांकि, हाई कोर्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत स्पष्ट किया कि दुर्ग संभाग के संभागीय संयुक्त संचालक, शिक्षा की ओर से मांगी गई जानकारी के आधार पर की जाने वाली कोई भी पदोन्नति इस रिट याचिका के अंतिम परिणाम के अधीन रहेगी। इसका सीधा मतलब है कि प्रमोशन प्रक्रिया फिलहाल जारी रह सकती है, लेकिन जिन शिक्षकों की पदोन्नति इस प्रक्रिया के तहत होगी, उस पर हाई कोर्ट के अंतिम फैसले का असर रहेगा।

Teacher e-cadre: शिक्षकों के लिए क्यों अहम है यह मामला?

TET और शिक्षक प्रमोशन को लेकर पहले से ही शिक्षकों के बीच विवाद बना हुआ है। खासकर लंबे समय से सेवा दे रहे ऐसे शिक्षक, जिन्होंने TET पास नहीं की है, उनके प्रमोशन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब इस मामले में हाई कोर्ट का अंतिम फैसला यह तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है कि प्राथमिक TET पेपर-1 पास नहीं करने वाले शिक्षकों की शिक्षक (ई-कैडर) पद पर पदोन्नति की दावेदारी पर किस तरह विचार किया जाएगा। फिलहाल हाई कोर्ट ने प्रमोशन प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाई है। अगली सुनवाई और राज्य सरकार के जवाब के बाद इस मामले में आगे की स्थिति साफ होगी। तब तक संबंधित पदों पर होने वाली पदोन्नतियां हाई कोर्ट में लंबित रिट याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी।

Updated on:
09 Sept 2026 07:41 pm
Published on:
09 Sept 2026 07:40 pm