
SI प्रमोशन मामले में हाईकोर्ट का अहम फैसला (Photo Source- Patrika File Photo)
SI Promotion: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर से इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पदोन्नति के लिए निर्धारित अर्हकारी सेवा की गणना कर्मचारी की वास्तविक ज्वाइनिंग तारीख से नहीं, बल्कि उस कैलेंडर वर्ष से की जाएगी, जिसमें कर्मचारी ने फीडर कैडर में नियुक्ति प्राप्त की है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सब इंस्पेक्टर (रेडियो) के पद पर कार्यरत चार पुलिस अधिकारियों की रिट अपील पर सुनाया। अदालत के इस फैसले से चारों अधिकारियों को राहत मिली है और उन्हें 1 जनवरी 2025 से पदोन्नति के लिए विचार योग्य माना जाएगा।
मामला ओम प्रकाश देवांगन, धर्मेश कुमार साहू, अपराजिता सिंह राणा और गौरव शुक्ला से जुड़ा है। चारों अधिकारियों की नियुक्ति वर्ष 2017 में सब इंस्पेक्टर (रेडियो) के पद पर हुई थी। हालांकि, उन्होंने नवंबर 2017 में अपनी सेवाएं ज्वाइन की थीं। छत्तीसगढ़ पुलिस कार्यपालिक (अराजपत्रित) सेवा भर्ती नियम, 2021 के तहत सब इंस्पेक्टर (रेडियो) से इंस्पेक्टर (रेडियो) पद पर पदोन्नति के लिए आठ वर्ष की अर्हकारी सेवा पूरी होना जरूरी है। विवाद इस बात को लेकर था कि आठ वर्ष की सेवा की गणना नियुक्ति के कैलेंडर वर्ष से की जाएगी या फिर कर्मचारी की वास्तविक ज्वाइनिंग तारीख से।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि छत्तीसगढ़ लोक सेवाएं (पदोन्नति) नियम, 2003 के नियम 6(2) में अर्हकारी सेवा की गणना को लेकर स्पष्ट प्रावधान है। उनके मुताबिक जिस कैलेंडर वर्ष में कर्मचारी फीडर कैडर में नियुक्त होता है, उसी वर्ष को सेवा गणना का पहला वर्ष माना जाना चाहिए। चारों अधिकारियों ने तर्क दिया कि उनकी नियुक्ति वर्ष 2017 में हुई थी। इसलिए 2017 को पहला वर्ष, 2018 को दूसरा, 2019 को तीसरा और इसी क्रम में वर्ष 2024 को आठवां वर्ष माना जाना चाहिए। इस आधार पर उनका कहना था कि वे आठ वर्ष की अर्हकारी सेवा पूरी कर चुके थे और 1 जनवरी 2025 से इंस्पेक्टर (रेडियो) पद पर पदोन्नति के लिए विचार किए जाने के पात्र थे।
इससे पहले मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की एकल पीठ में हुई थी। एकल पीठ ने 10 अक्टूबर 2025 को याचिका खारिज कर दी थी। एकल पीठ ने वास्तविक ज्वाइनिंग तारीख को आधार मानते हुए कहा था कि चारों अधिकारियों ने नवंबर 2017 में सेवा ज्वाइन की थी। ऐसे में वे अक्टूबर-नवंबर 2025 के आसपास आठ वर्ष की वास्तविक सेवा पूरी करेंगे और 1 जनवरी 2026 से पदोन्नति के लिए पात्र माने जाएंगे। एकल पीठ के इस फैसले के खिलाफ चारों अधिकारियों ने डिवीजन बेंच में रिट अपील दायर की थी।
डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ लोक सेवाएं (पदोन्नति) नियम, 2003 के नियम 6(2) की व्याख्या पर विशेष रूप से विचार किया। अदालत ने कहा कि नियम में अर्हकारी सेवा की गणना उस कैलेंडर वर्ष से करने का प्रावधान है, जिसमें कर्मचारी ने फीडर कैडर में प्रवेश किया है। इसलिए वास्तविक ज्वाइनिंग की तारीख को अलग से आधार बनाकर पात्रता को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब किसी कर्मचारी की नियुक्ति वर्ष 2017 में हुई है, तो 2017 को अर्हकारी सेवा का पहला वर्ष माना जाएगा, भले ही कर्मचारी ने उस वर्ष के किसी बाद के महीने में कार्यभार ग्रहण किया हो।
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा कि अपीलकर्ताओं के लिए वर्ष 2017 पहला वर्ष, 2018 दूसरा, 2019 तीसरा, 2020 चौथा, 2021 पांचवां, 2022 छठा, 2023 सातवां और 2024 आठवां वर्ष माना जाएगा। इस तरह चारों अधिकारियों को 1 जनवरी 2025 तक आठ वर्ष की अर्हकारी सेवा पूरी करने वाला माना गया। अदालत ने कहा कि एकल पीठ द्वारा केवल वास्तविक ज्वाइनिंग तारीख को आधार बनाकर पात्रता तय करना नियमों की सही व्याख्या नहीं थी।
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने 10 अक्टूबर 2025 को एकल पीठ द्वारा दिए गए आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत ने चारों अधिकारियों की रिट अपील स्वीकार करते हुए राज्य सरकार और संबंधित विभाग को उनके पदोन्नति मामलों पर विचार करने के निर्देश दिए। अदालत ने कहा कि चारों अधिकारियों को इंस्पेक्टर (रेडियो) पद पर पदोन्नति के लिए 1 जनवरी 2025 से पात्र माना जाएगा।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि चारों अधिकारियों के मामलों को विभागीय पदोन्नति समिति यानी DPC के समक्ष रखा जाना चाहिए था। अदालत के अनुसार पदोन्नति का अंतिम निर्णय अन्य सभी आवश्यक पात्रता शर्तों और रिक्त पदों की उपलब्धता के आधार पर लिया जाएगा। याचिकाकर्ताओं ने यह भी बताया था कि इंस्पेक्टर (रेडियो) के सात पद रिक्त थे और वे वरिष्ठता सूची के आधार पर पदोन्नति के दायरे में आते थे। अब विभाग को अदालत के आदेश के अनुसार उनके मामलों पर विचार करना होगा।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि चारों अधिकारियों को सीधे पदोन्नति देने का आदेश नहीं दिया गया है, बल्कि उन्हें 1 जनवरी 2025 से पदोन्नति के लिए विचार योग्य माना गया है। उनकी पदोन्नति का फैसला विभागीय पदोन्नति समिति द्वारा अन्य सभी पात्रता शर्तों, वरिष्ठता, सेवा रिकॉर्ड और रिक्त पदों की उपलब्धता को देखते हुए किया जाएगा।
यदि वे सभी निर्धारित शर्तों को पूरा करते हैं तो उन्हें नियमों के अनुसार परिणामी लाभ भी दिए जाएंगे।हाईकोर्ट का यह फैसला पुलिस विभाग और अन्य सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति से जुड़े मामलों में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर उन परिस्थितियों में जहां अर्हकारी सेवा की गणना नियुक्ति वर्ष और वास्तविक ज्वाइनिंग तारीख के बीच विवाद का विषय बनती है।
Updated on:
06 Sept 2026 06:26 pm
Published on:
06 Sept 2026 06:26 pm
