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Bilaspur News: शिक्षक की मेहनत से 30 से ज्यादा बने बाल वैज्ञानिक, PM मोदी और रूस के राष्ट्रपति के सामने दिखाया हुनर

Student Innovation: सरकारी स्कूल के बच्चों को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वे किसी भी बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा साबित कर सकते हैं। एक शिक्षक की मेहनत और लगन ने इसे सच कर दिखाया।
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Chhattisgarh News

राष्ट्रपति भवन से अबूधाबी तक पहुंची छात्रों की प्रतिभा (फोटो सोर्स - पत्रिका)

Chhattisgarh News: सरकारी स्कूल के बच्चों को अक्सर संसाधनों की कमी और अवसरों के अभाव का सामना करना पड़ता है, लेकिन यदि उन्हें सही मार्गदर्शन और अपनी प्रतिभा को निखारने का अवसर मिले तो वे बड़े मंचों पर भी अपनी काबिलियत साबित कर सकते हैं। बिलासपुर के शासकीय बहुउद्देशीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्रों ने इसे सच साबित किया है। अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) के प्रभारी रहते हुए शिक्षक डॉ. धनंजय पाण्डेय के मार्गदर्शन में स्कूल के 30 से अधिक छात्र बाल वैज्ञानिक बन चुके हैं। इन छात्रों ने अपने नवाचारों और आविष्कारों को राष्ट्रपति भवन से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक प्रस्तुत किया है।

2017 में शुरू हुई अटल टिंकरिंग लैब

दयालबंद स्थित शासकीय बहुउद्देशीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में वर्ष 2017 में अटल टिंकरिंग लैब की शुरुआत हुई। शुरुआती दौर में लैब को लेकर कई चुनौतियां सामने आईं। यहां तक कहा गया कि यह स्कूल इस तरह के नवाचार और तकनीकी गतिविधियों के लिए उपयुक्त नहीं है। डॉ. धनंजय पाण्डेय ने इन बातों को चुनौती के रूप में लिया और बच्चों के साथ लगातार प्रयोग और नए प्रोजेक्ट तैयार करने पर काम किया।

उन्होंने छात्रों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय अपने आसपास की समस्याओं को पहचानने और उनके व्यावहारिक समाधान तलाशने के लिए प्रेरित किया। धीरे-धीरे छात्रों में विज्ञान और तकनीक के प्रति रुचि बढ़ी और वे अपने आसपास की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए-नए मॉडल और प्रोजेक्ट तैयार करने लगे।

सफाई से किसानों की मदद तक बनाए प्रोजेक्ट

छात्रों ने पर्यावरण और जनजीवन से जुड़ी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कई उपयोगी प्रोजेक्ट तैयार किए। अरपा नदी में प्रदूषण की समस्या को देखते हुए छात्रों ने ‘मोक्ष’ प्रोजेक्ट तैयार किया। इसी तरह किसानों के श्रम और लागत को कम करने के उद्देश्य से सौर ऊर्जा से चलने वाला ‘अटल कृषि मित्र’ तैयार (Bilaspur News) किया गया।

इसके अलावा छात्रों ने स्मार्ट बायो टॉयलेट और प्लास्टिक से तैयार ‘ग्रीन शील्ड’ जैसे प्रोजेक्ट भी बनाए। इन नवाचारों को विभिन्न स्तरों पर सराहना मिली। एटीएल मैराथन में स्कूल के तीन प्रोजेक्ट का चयन भी हुआ, जिससे छात्रों का उत्साह और बढ़ा।

प्रोजेक्ट की सफलता से छात्रों को मिला इंजीनियरिंग का अवसर

डॉ. पाण्डेय के मार्गदर्शन में तैयार किए गए प्रोजेक्टों की सफलता का असर छात्रों के भविष्य पर भी पड़ा। स्कूल के छह छात्रों का चयन लक्ष्मीचंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बोदरी में हुआ। यहां छात्रों को नि:शुल्क शिक्षा के साथ किताबें और हॉस्टल जैसी सुविधाएं भी मिलीं। इस तरह नवाचार और प्रयोगों के जरिए छात्रों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ आगे की पढ़ाई के बेहतर अवसर भी प्राप्त हुए।

राष्ट्रपति भवन से अबूधाबी तक पहुंची छात्रों की प्रतिभा

स्कूल के छात्रों द्वारा तैयार किए गए ‘अटल कृषि मित्र’ प्रोजेक्ट का प्रदर्शन राष्ट्रपति भवन में किया गया। छात्रों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति के सामने भी अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुत करने का अवसर मिला। सरकारी स्कूल के इन बच्चों के लिए यह बड़ी उपलब्धि रही।

इसके अलावा छात्रों ने अंतरराष्ट्रीय रोबोटिक प्रतियोगिता में भी सफलता हासिल की। इस प्रतियोगिता के जरिए उन्हें अबूधाबी में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला। स्थानीय स्तर से शुरू हुआ छात्रों का यह सफर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा, जो स्कूल और उनके मार्गदर्शक शिक्षक के लिए भी गौरव की बात है।

नीति आयोग ने दिया नंबर-1 शिक्षक का सम्मान

डॉ. धनंजय पाण्डेय के नवाचार और छात्रों को आगे बढ़ाने के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। नीति आयोग ने वर्ष 2022 में देशभर के अटल टिंकरिंग लैब प्रभारियों के कामकाज का मूल्यांकन किया। इस मूल्यांकन में डॉ. धनंजय पाण्डेय को नंबर-1 शिक्षक अवार्ड से सम्मानित किया गया।

उनकी पहल और मार्गदर्शन से सरकारी स्कूल के बच्चों को न केवल विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिला, बल्कि उन्होंने बड़े मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन भी किया। संसाधनों की सीमाओं के बावजूद छात्रों को प्रयोग करने, समस्याओं को समझने और उनके समाधान खोजने के लिए प्रेरित करने का यह प्रयास सरकारी स्कूलों के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया है।