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Teacher’s Day 2026: आंखों की रोशनी गई, ज्ञान का उजाला नहीं… सैकड़ों बच्चों को पढ़ा रहे मूरितराम, जानें बिलासपुर के शिक्षक का सफर

Muritram Kashyap: शिक्षा को अपना सहारा बनाकर उन्होंने न केवल खुद आगे बढ़ने का रास्ता बनाया, बल्कि आज सैकड़ों बच्चों को गणित, अंग्रेजी और संस्कृत की नि:शुल्क शिक्षा देकर उनके भविष्य को संवार रहे हैं।
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Chhattisgarh News

मूरितराम कश्यप (फोटो सोर्स - पत्रिका)

Blind Teacher Inspirational Story: गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर:… गुरु की महिमा को बयां करने वाली यह पंक्तियां बिलासपुर के मूरितराम कश्यप के जीवन पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। आंखों की रोशनी भले ही उनका साथ नहीं देती, लेकिन उनके ज्ञान, हौसले और सेवा भावना ने वर्षों से सैकड़ों बच्चों और युवाओं के जीवन में शिक्षा का उजाला फैलाया है।

जन्म के कुछ वर्षों बाद चेचक की गंभीर बीमारी के कारण महज छह साल की उम्र में मूरितराम की आंखों की रोशनी चली गई। जिंदगी में आए इस अंधकार को उन्होंने कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।

बल्कि शिक्षा को अपना हथियार बनाकर न केवल खुद आगे बढ़े, बल्कि दूसरों के जीवन को भी ज्ञान के प्रकाश से रोशन करने का संकल्प लिया। आज वे रेलवे की नौकरी से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन बच्चों को पढ़ाने का उनका जुनून पहले की तरह ही कायम है।

रेलवे की नौकरी के साथ शुरू किया शिक्षा का सफर

बिलासपुर के मूरितराम कश्यप ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा रेलवे में सेवा करते हुए बिताया। रेलवे में आठ घंटे की जिम्मेदारी निभाने के बाद वे अपना समय बच्चों को पढ़ाने में लगाते थे। सिरगिट्टी स्थित अपने घर को ही उन्होंने एक तरह से छोटे से विद्यालय में बदल दिया, जहां सुबह और शाम जरूरतमंद विद्यार्थियों को गणित, अंग्रेजी, संस्कृत सहित अन्य विषयों की नि:शुल्क शिक्षा दी जाती है।

ताकत समझें: विकलांगता को कमजोरी नहीं

मूरितराम कश्यप कहते हैं कि शारीरिक अक्षमता को कभी अपनी कमजोरी नहीं समझना चाहिए। यदि इंसान अपने हौसले और मेहनत पर भरोसा रखे तो कोई भी परिस्थिति उसे सफलता से रोक नहीं सकती। उनका कहना है कि उनका उद्देश्य अधिक से अधिक बच्चों और युवाओं तक शिक्षा पहुंचाना है, ताकि वे अपने पैरों पर खड़े हो सकें और देश के विकास में योगदान दें। वे कहते हैं कि समाज में ज्ञान का प्रकाश जितना अधिक फैलेगा, देश उतना ही मजबूत होगा।

ब्रेल से पढ़कर, कठिन विषय समझाते हैं

मूरितराम का पढ़ाने का तरीका भी अपने आप में अनूठा है। वे ब्रेल लिपि में लिखी पुस्तकों का अध्ययन करते हैं और फिर बच्चों को मौखिक रूप से विषय समझाते हैं। गणित के सूत्र हों, अंग्रेजी के नियम हों या संस्कृत के कठिन पाठ, वे सरल और सहज तरीके से विद्यार्थियों को समझाने का प्रयास करते हैं। उनकी यही मौखिक शिक्षण पद्धति बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय है। विद्यार्थी बताते हैं कि मूरितराम के समझाने का तरीका उन्हें विषयों को आसानी से समझने और लंबे समय तक याद रखने में मदद करता है।