जिला अस्पताल में डॉक्टरों की मनमानी का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। यहां दो ईएनटी स्पेशलिस्ट हैं, दोनों एक साथ छुट्टी पर चले गए। इससे ओपीडी में महीने की पहली तारीख से 15 दिन तक के लिए ताला गया। मरीज इलाज के लिए भटक रहे हैं। आए दिन हंगामे की स्थिति बन रही है। मरीजों को सिम्स या निजी अस्पताल जाने की सलाह दी जा रही है। कलेक्टर ने लोक सुराज अभियान के दौरान सभी शासकीय विभागों में छुटियां प्रतिबंधित कर रखी है। लेकिन जिला अस्पताल में इस आदेश का कोई असर नहीं दिख रहा। यहां कई डॉक्टर सिविल सर्जन के मना करने के बावजूद छुट्टी पर चले गए। सबसे बुरा हाल नाक, कान, गला रोग विभाग का है। इस विभाग में दो डॉक्टर हैं। इनमें डॉ. प्रमोद महाजन 15 दिन के अवकाश पर गए हैं।
उनके जाते ही डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने भी सिविल सर्जन से छुट्टी मांगी। जब सिविल सर्जन ने ओपीडी बंद हो जाने की समस्या बताई, तो उन्होंने डॉ. महाजन के आने के बाद छुट्टी लेने की बात कही। लेकिन बाद में डॉ. श्रीवास्तव मेडिकल लीव पर चले गए। अब ईएनटी विभाग के दोनों डॉक्टर छुट्टी हैं, और यहां 16 नंबर की ओपीडी पर 1 मई से ताला लटक रहा है। मरीजों ने इलाज को लेकर हंगामा किया तो सिविल सर्जन डॉ. मधुलिका सिंह ने ओपीडी के बाहर सूचना चस्पा करवा दी।
कोटा के नैब सिंह ने बताया कि उसके गले में काफी दिन से समस्या थी। जिला अस्पताल में दस रुपए की ओपीडी पर्ची कटाने के बाद उसे पता चला डॉक्टर 15 दिन की छुट्टी पर हैं। वह इलाज के लिए पास के एक निजी अस्पताल में गया तो केवल तीन दिन की फीस और जांच पर ही 2 हजार रुपए देने पड़े। उसने उधार लेकर इलाज कराया, अब आगे उसकी क्षमता नहीं है।
ईएनटी विभाग में दो डॉक्टर पदस्थ हैं। दोनों ही अचानक छुट्टी पर चले गए हैं। मरीजों को सूचित करने के लिए ओपीडी के बाहर सूचना लगा दी गई है।
डॉ. मनोज जायसवाल, आरएमओ, जिला अस्पताल