
सीएम ममता बनर्जी। (Photo-IANS)
पश्चिम बंगाल में सत्ता की लड़ाई अब अपने आखिरी मुकाम पर पहुंच गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) 15 साल से बिना रुके सत्ता में है, लेकिन इस बार भाजपा ने उनको जबरदस्त चुनौती दी है। एग्जिट पोल के नतीजे बता रहे हैं कि यह मुकाबला बेहद कड़ा और निजी स्तर का हो गया है।
294 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 148 सीटें चाहिए। ज्यादातर एग्जिट पोल्स के मुताबिक दोनों पार्टियां इस आंकड़े के आसपास घूम रही हैं।
कई पोल्स भाजपा को बहुमत के करीब या पार दिखा रहे हैं, जबकि कुछ टीएमसी को बढ़त दे रहे हैं। ममता बनर्जी ने इन पोल्स को भाजपा का मनोबल तोड़ने का हथियार बताया है और दावा किया कि उनकी पार्टी 226 सीटों से ज्यादा जीतेगी।
इस बार का नतीजा सबसे ज्यादा दक्षिण बंगाल के सात जिलों पर निर्भर करेगा, जहां दूसरे चरण में 142 सीटों पर वोटिंग हुई। 2021 में टीएमसी ने इनमें भारी बहुमत हासिल किया था। अब यही इलाका टीएमसी की किस्मत और भाजपा की उम्मीद दोनों को तय करने वाला है।
दक्षिण बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा, नौकरियां, भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे लोगों के मन में हैं। इसके बावजूद भाजपा के पक्ष में कोई बड़ी लहर साफ नजर नहीं आ रही।
ममता बनर्जी ने इस बार भी भावनात्मक मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) पर हमला किया और बंगाली अस्मिता की बात जोर-शोर से रखी।
उत्तर बंगाल में भाजपा पहले से मजबूत है। 2019 लोकसभा चुनाव में पार्टी ने यहां बड़ी छलांग लगाई थी। दार्जिलिंग की पहाड़ियां, आसनसोल का औद्योगिक इलाका और पश्चिमी बंगाल के आदिवासी क्षेत्रों में भाजपा का झंडा लहरा रहा है।
मटुआ समुदाय भी इस चुनाव में अहम भूमिका निभा सकता है। यह समुदाय मुख्य रूप से उत्तर 24 परगना और नदिया जिलों में बसता है।
मटुआ मूल रूप से बांग्लादेश से आए हिंदू शरणार्थी हैं। भाजपा ने इनके एक बड़े हिस्से को अपने पाले में लाने की कोशिश की है। CAA जैसे मुद्दे पर पार्टी ने उन्हें आश्वासन दिए हैं।
2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा 77 सीटों तक पहुंचकर मुख्य विपक्ष बनी। कांग्रेस और वामपंथी लगभग गायब हो गए। कई एग्जिट पोल्स तब भी भाजपा की जीत बता रहे थे, लेकिन ममता बनर्जी ने दक्षिण बंगाल में जोरदार वापसी कर सबको चौंका दिया।
2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीटें 12 रह गईं। टीएमसी ने राहत की सांस ली। अब 2026 में फिर वही सवाल है - क्या दक्षिण बंगाल ममता को बचा पाएगा या भाजपा इतिहास रच देगी?
राज्य की राजनीति में एक खास बात यह है कि कई लोग अपनी राय खुलकर नहीं बताते। हिंसा और दबाव के डर से कुछ वोटर चुप रहते हैं। इस बार बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों से मजदूर लौटे हैं और वोट डालने आए हैं।
कुछ SIR के डर से वोटर लिस्ट में नाम बचाने के लिए आए, तो कुछ अपनी पार्टी के साथ खड़े होने के लिए। ममता बनर्जी 2011 में वामपंथियों को हराकर सत्ता में आई थीं। तब सिंगीूर-नंदीग्राम का किसान आंदोलन उनके पक्ष में था।
इस बार भी उन्होंने भावनाओं को भुनाने की कोशिश की है। चुनाव नतीजे 4 मई को आएंगे। अभी तक का माहौल बता रहा है कि मुकाबला सीधा टीएमसी और भाजपा के बीच है।
दक्षिण बंगाल के 142 सीटों का रुख अंतिम फैसला करेगा। चाहे कोई भी जीते, यह चुनाव बंगाल की राजनीति में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
Updated on:
01 May 2026 06:02 pm
Published on:
01 May 2026 06:02 pm
