बिलासपुर

Bilaspur News: महामाया मंदिर कुंड में कछुओं की रहस्यमयी मौतें, 1 साल में 34 जानें गईं, जांच रिपोर्ट अभी भी लापता

Bilaspur News: मां महामाया मंदिर के पवित्र कुंड में लगातार कछुओं के घायल और मृत मिलने की घटनाओं ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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रतनपुर महामाया कुंड में फिर 4 कछुओं की संदिग्ध मौत (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Bilaspur News: मां महामाया मंदिर के पवित्र कुंड में लगातार कछुओं के घायल और मृत मिलने की घटनाओं ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले एक वर्ष में जहां करीब 30 कछुओं की मौत हुई थी, वहीं हाल ही में चार और कछुओं के मृत मिलने से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है।

कई कछुओं के शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं, जिससे आशंका जताई जा रही है कि किसी ने उन्हें जानबूझकर नुकसान पहुंचाया है। इधर सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और मृत कछुओं का पोस्टमार्टम कराया। प्रारंभिक जांच में विशेषज्ञों ने बाहरी चोट, पानी में प्रदूषण या जहरीले तत्व की संभावना से इनकार नहीं किया है। विभाग का कहना है कि विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा।

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प्राकृतिक या मानवीय करतूत

वन्य जीवों के जानकारों के अनुसार यदि कछुओं के खोल या गर्दन पर चोट के निशान हैं तो यह प्राकृतिक मौत नहीं बल्कि बाहरी हस्तक्षेप का संकेत हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कुंड में डाले जाने वाले प्रसाद, प्लास्टिक या रसायनयुक्त सामग्री भी जलचर जीवों के लिए घातक साबित हो सकती है। पिछले बार भी कछुओं के मौत के बाद प्रबंधक के कई सदस्यों पर एफआईआर हुई थी, बाद में उन्हें कोर्ट से जमानत मिली थी।

जांच रिपोर्ट अब तक नहीं हुई सार्वजनिक

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले साल भी इसी तरह की घटना हुई थी, जिसकी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। अब लगातार हो रही मौतों से यह सवाल उठ रहा है कि आखिर दोषी कौन है और कार्रवाई कब होगी। श्रद्धालुओं ने प्रशासन से कुंड की सुरक्षा बढ़ाने, सीसीटीवी लगाने और नियमित निगरानी की मांग की है, ताकि पवित्र स्थल और वहां के जीवों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

तालाब की सफाई में कछुओं का योगदान

कछुए तालाब के पानी में मौजूद सडऩे वाले कार्बनिक पदार्थों, मरी हुए मछलियों, कीड़ों और कचरे को खाकर पानी को साफ रखते हैं। ये तालाब में काई और जलीय पौधों को खाकर उनकी अति-वृद्धि को रोकते हैं, जिससे पानी का संतुलन बना रहता है। मरे हुए जीव-जंतुओं को खाकर, ये पानी में अमोनिया और फास्फोरस के स्तर को कम करते है। कछुओं को स्वस्थ रखने के लिए तालाब के पानी को साफ रखना आवश्यक है।

एक्सपर्ट व्यू: पानी की हर 6 से 12 माह में कराए जांच

कई बार पर्यावरण परिवेश का भी असर कछुओं पर पड़ता है। मां महामाया मंदिर रतनपुर का जो तालाब है उसके पानी का हर 6 माह या 12 माह में जांच कराना चाहिए क्योंकि पानी में कार्बनिक व अकार्बनिक तत्वों की कमी या बढ़ोतरी से भी कछुओं की मौत हो सकती है। इसके अलावा जलीय पौधे है कि नहीं क्योंकि कछुए इन्हीं पर निर्भर रहते है। ऐसे में भोजन की कमी के कारण भी उनकी मौत हो सकती है। कुंड सीमेंट का है तो उसका भी असर पड़ सकता है। प्लास्टिक और गंदगी के कारण भी कछुओं की मौत हो सकती है। प्रबंधन को इन सभी बातों का ध्यान रखना चाहिए। - डॉ. मनीष त्रिपाठी, सहायक प्रोफेसर, जीजीयू, बिलासपुर

Published on:
17 Feb 2026 11:10 am
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