Bilaspur News: कुशीनगर के कसया क्षेत्र में ईंट भट्ठे के पानी से भरे गड्ढे में डूबने से छत्तीसगढ़ के तीन मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ जब बच्चे खेलते-खेलते गड्ढे में उतर गए।
Bilaspur News: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में शनिवार सुबह एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया, जिसमें छत्तीसगढ़ के तीन मासूम बच्चों की डूबने से मौत हो गई। यह घटना कसया थाना क्षेत्र के मैनपुर गांव स्थित दीनापट्टी टोला में संचालित पंकज ईंट भट्ठे के परिसर में हुई, जहां मिट्टी खनन के लिए खोदे गए गड्ढे में बारिश का पानी भर गया था।
जानकारी के अनुसार, ईंट भट्ठे पर मजदूरी करने वाले परिवारों के बच्चे सुबह के समय खेल रहे थे। इसी दौरान वे भट्ठा परिसर में बने उस गड्ढे के पास पहुंच गए, जिसमें ईंट निर्माण के लिए मिट्टी निकाली गई थी और बारिश का पानी भरा हुआ था। बिना खतरे का अंदाजा लगाए तीनों बच्चे पानी में उतर गए, लेकिन गहराई अधिक होने के कारण वे डूबने लगे। कुछ ही पलों में यह खेल एक दर्दनाक हादसे में बदल गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पास में खेल रही एक अन्य बच्ची ने घटना देख शोर मचाया, जिसके बाद आसपास मौजूद मजदूर और परिजन मौके पर पहुंचे। बच्चों को तुरंत बाहर निकालकर कसया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। हादसे के बाद पूरे भट्ठा परिसर में चीख-पुकार मच गई और माहौल गमगीन हो गया।
मृतकों की पहचान 7 वर्षीय अनन्या (जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा क्षेत्र के बाजा गांव की निवासी), 3 वर्षीय अभय (फरहदा गांव निवासी पंचू पटेल का पुत्र) और ढाई वर्षीय अनुष्का (सुखन की पुत्री) के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, तीनों मासूम अपने परिवारों के साथ ईंट भट्ठे पर ही रहकर मजदूरी कार्य में लगे हुए थे।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की गई। कसया थाना प्रभारी अशुतोष सिंह ने बताया कि आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है और यह भी जांच की जा रही है कि गड्ढा खोदने और मिट्टी खनन की वैधानिक अनुमति ली गई थी या नहीं।
कुशीनगर प्रशासन ने मृतक बच्चों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। अधिकारियों के अनुसार, प्राकृतिक आपदा राहत कोष से प्रत्येक परिवार को चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर ईंट भट्ठों पर काम करने वाले मजदूर परिवारों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खुले गड्ढों को बिना सुरक्षा घेरे के छोड़ देना लगातार जानलेवा साबित हो रहा है, लेकिन ऐसी घटनाओं से सबक लेने की जरूरत अब भी अधूरी नजर आती है।