
नई दिल्ली। बॉलीवुड में हर स्टार्स अपने किरदार से जाना जाता है। फिर चाहे वो अभिनय नायक का हो, या फिर खलनायक का। दर्शको के दिलों में उसी नाम से एक खास जगह बन जाती है। और लोग उन्हें उसी नजरों से भी देखना ज्यादा पसंद करते है। ऐसा ही कुछ 70 से 80 में काम करने वाली एक एक्ट्रेस के साथ हुआ,जिसकी छवि हर किसी के दिल में गहरी छाप छोड़ चुकी है।
हम बात करे रहे हैं फिल्मों में खलनायिका का अहम रोल करने वाली अभिनेत्री बिंदु की। उन्होंने कुछ ही वक्त में अपनी अलग पहचान बना ली। 17 अप्रैल 1941 को बिंदु का जन्म गुजरात में हुआ था।
मोना डार्लिंग के नाम से चर्चित बिंदु ने हिंदी सिनेमा को ऐसी खलनायिका दी जिसकी अहमियत उस दौरान उड़ान भर रही हीरोइन से ज्यादा थी। बिंदु ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1962 में आई फिल्म 'अनपढ़' से की थी। इसके बाद इत्तेफाक में उन्होंने शानदार काम किया। उनकी ये दोनों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुईं।
बताया जाता है कि जब बिंदु जब मात्र 13 साल की थीं तभी उनके सिर पर घर की जिम्मेदारियों को बोझ आ गया था क्योंकि उनके पिता का देहांत होने के बाद वो अकेली थी। इसी बीच बढ़ती उम्र के साथ बिंदु को अपने पड़ोस में रहने वाले चंपकलाल जावेरी से प्यार हो गया, जिसके बाद दोनों ने शादी रचा ली।
एक इंटरव्यू के दौरान बिंदु ने बताया था कि "जब मैंने फिल्मों में एंट्री की तो शुरुआत में खलनायिका का दौर काफी ज्यादा था। लेकिन मैं हीरोइन बनना चाहती थी, पर हर किसी ने मेरे उपर की कमिया खोज निकाली। जो एक हिरोइन बनने के लायक नही थी। फिर मैने शुरुआत की फिल्म 'दो रास्ते' के साथ और मैं बन गई विलेन।'' 1970 में आई फिल्म 'कटी पतंग' के गाने 'मेरा नाम है शबनम' से बिंदु रातों रात आइटम क्वीन बन गईं।
फिल्मों में खलनायिका के रोल से भले ही बिंदू को पहचान मिली, लेकिन इसका असर इनकी जिंदगी में काफी देखने को मिला। जिसका परिणाम यह हुआ कि उन्हें लोग खराब नजरों से देखने लगे। इतना ही नही उनके घर के बच्चे भी जब उनकी फिल्मों में बुरी मां का किरदार देखते तो वो भी उनसे कहते थे, बिंदु आंटी आप हमारे साथ तो ऐसा नहीं करती फिर फिल्म में ऐसा क्यों करती हो?
यही नहीं जब वो सिनेमाहॉल में फिल्म देखने जाती थी तो लोग चिल्ला पड़ते थे और उनके किरदार की वजह से उन्हें गालियां तक खानी पड़ती थीं।
लेकिन आज भी इस एक्ट्रेस को उनके निगेटिव रोल के किरदारों की वजह से याद किया जाता है। ये उस दौर की वो सफल अदाकारा रही है जिसने कड़ी मेहनत के साथ एक खास अभिनय के दम पर लोगों को जिंदगी की कड़वी सच्चाई से अपने निगेटिव किरदार के माध्यम से अवगत कराया है जो अपने आप में एक गर्व की बात है।
बिंदू ने इम्तिहान, हवस, जंजीर, 'आया सावन झूम के', 'अमर प्रेम', 'राजा जानी', 'मेरे जीवन साथी', 'अभिमान', 'घर हो तो ऐसा' और 'बीवी हो तो ऐसी' जैसी कई फिल्मों में काम किया।