
फ़िल्मों में हीरों से पंगा लेने और हेरोइन की इज़्ज़त पर हाथ डालने तक बॉब ने वो सब कुछ किया है जो उस दौर में हिन्दी फ़िल्मों के विलेन किया करते थे। बॉब ने इस भद्दी फ़िल्मों में अंग्रेज़ी अफ़सर बनकर हिंदुओं पर ज़ुल्म ढाने का रोल भी बख़ूबी निभाया है।
Bob Christo का जन्म 1938 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में हुआ था। बॉब ने अपनी पढ़ाई लिखाई जर्मनी से की है। थिएटर मैं काम करने के दौरान उनकी मुलाक़ात हेल्गा नाम की लड़की से हुई जिससे उन्होंने शादी किया उनके तीन बच्चे हुए। लेकिन एक कार एक्सीडेंट के दौरान उनकी पत्नी का निधन हो गया जिसके बाद वह अपने बच्चों को एक अमेरीकन कपल को सौंप एक आर्मी असाइनमेंट पर चले गए
1970 में बॉब ने कवर पेज पर परवीन बॉबी की तस्वीर देखी उन पर फ़िदा हो गए। और उनसे मिलने भारत आ गए। भारत आने के बाद बाप की मुलाक़ात चर्चगेट के पास एक फ़िल्म की यूनिट से हुई। बातचीत करने के बाद पता चला कि इस यूनिट का कैमरामैन अगले ही दिन ‘द बर्निंग ट्रेन’ के सेट पर परवीन बॉबी से मिलने वाला है। अगले दिन कैमरामैन की मदद से बॉब ने परवीन से मुलाक़ात की। क्या मुलाक़ात एक दोस्ती में बदल गई।
परवीन बॉबी की मदद से ही हिन्दी सिनेमा जगत में अपनी जगह बना पाए बॉब। साल 1978 में हिंदी फ़िल्म अरविंद देसाई की अजीब दास्ता से बॉलीवुड में डेब्यू किया था बॉब ने। उनके बेहतरीन प्रदर्शन के बाद उन्हें एक के बाद एक फ़िल्म में मिलते गई और वह ऊंचाइयां छूते गए ।
बॉब का मृत्यु 20 मार्च 2011 को 72 साल की उम्र में हाट अटैक की वजह से में हो गया था। बॉब ने सिर्फ़ हिंदी ही नहीं बल्कि तमिल तेलुगु मलयालम कन्नड़ और अंग्रेज़ी भाषा के 200 से अधिक फ़िल्मों में काम किया है।