बॉलीवुड

महिला आधारित फिल्म में काम करना चाहती हैं भूमि पेडनेकर

24 फिल्मों का आॅफर ठुकराने वाली भूमि करना चाहती हैं महिलाओं पर बेस्ड फिल्म
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Updated: 28 Nov 2017, 6:58 PM IST
Bhumi_Pednekar
Bhumi_Pednekar

बॉलीवुड अभिनेत्री भूमि पेडनेकर महिला आधारित फिल्म में काम करना चाहती हैं। भूमि ने फिल्म दम लगा के हईशा से बॉलीवुड में बतौर अभिनेत्री कदम रखा। इसके बाद भूमि ने 'टॉयलेट एक प्रेमकथा' और 'शुभ मंगल सावधान' जैसी विषयपरक फिल्मों में काम किया। भूमि अब अभिषेक चौबे निर्देशित फिल्म सोन चिडिय़ा में काम करने जा रही है। भूमि ने कहा, 'अब दौर अच्छे सिनेमा का आ गया है। अब महिला प्रधान फिल्में जम कर बन रही हैं। एक दौर था जब लंबे समय तक मोटापे को लोग काफी उदासीन भाव से देखते और बात करते थे। उस समय किसी वजनदार अभिनेत्री पर आधारित फिल्म बनाना मुश्किल था। लेकिन मुझे खुशी है की, दम लगा के हईशा ने लोगों का मोटापे को देखने का नजरिया बदला है। दम लगा के हईशा के बाद मुझे करीबन 24 फिल्में ऑफर हुई लेकिन वह कहानियां पसंद नहीं आई इसीलिए सही कहानी का इंतजार किया। मैंने टॉयलेट एक प्रेमकथा और शुभ मंगल सावधान जैसी फिल्में की क्योंकि, उनमें नायिकाओं का ज्यादा महत्व था।'

'जब मैं हीरोइन बनी तो रिश्‍तेदार परेशान हो गए थे'
एक्‍ट्रेस भूमि पेडनेकर बालीवुड की तीन फिल्‍मों में नजर आ चुकी हैं और उनकी तीनों फिल्‍में ही अपने अलग हटके विषय और मैसेज के कारण खबरों में रहीं। सिर्फ भूमि ही नहीं, बल्कि हिंदी फिल्मों में पहले की तुलना में ज्यादातर एक्‍ट्रेस मजबूत किरदारों में नजर आ रही हैं। लेकिन इन बदलते किरदारों के बाद भी एक्‍ट्रेस के लिए समाज की सोच में अभी भी वही रूढ़िवादी सोच नजर आती है। 28 साल की एक्‍ट्रेस ने गोवा में चल रहे भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) में ‘ब्रेकिंग स्टीरियोटाइप्स’ पर मास्टरक्लास में हिस्सा लिया और यहां आत करते हुए कहा कि एक मजबूत और आत्मविश्वास से भरपूर महिला को हमेशा ‘मुश्किल’ महिला की संज्ञा दी जाती है।

भूमि ने दिए अपने इंटरव्‍यू में कहा, 'समाज में हर कहीं, यहां तक कि मेरी रिश्तेदारी में भी, जब लोगों को पता चला कि मैं एक्‍ट्रेस बनने वाली हूं तो वे काफी परेशान हो गए क्योंकि अभिनेत्री शब्द के साथ काफी नकारात्मकता जुड़ी हुई है।' भूमि को लगता है कि सिनेमा में लंबे समय से महिलाओं को उनकी वाजिब जगह नहीं मिली है और महिलाओं को पुरूषों के चश्मे से देखा जाता है।

भूमि ने कहा, 'मुझे लगता है कि हमारी संस्कृति में, किसी भी ताकतवर महिला को मुश्किल कहा जाता है, या उसके लिए अलग-अलग शब्द का इस्तेमाल किया जाता है जोकि अपमानजनक है। यह दुखद है लेकिन हमारे देश में ऐसा ही है। हमारी संस्कृति में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है और हमें इसे लेकर कुछ करने की जरूरत है।'

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