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18 महीने बाद दिल्ली HC के आदेश पर सेलिना जेटली ने तोड़ी चुप्पी, बोली- एक सैनिक की इज्जत की वापसी…

Celina Jaitly Legal Battle: 18 महीने बाद दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर सेलिना जेटली ने अपनी चुप्पी तोड़ी और कहा कि इस लंबी लड़ाई के लिए उनकी हिम्मत खत्म हो चुकी है, इसीलिए इस पर जल्द से जल्द कार्रवाई हो।

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Feb 04, 2026
सेलिना जेटली (सोर्स: x @htTweets के अकाउंट द्वारा)

Celina Jaitly Legal Battle: बॉलीवुड एक्ट्रेस सेलिना जेटली ने मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट के उस अहम फैसले का वेलकम किया, जिसमें UAE की एक लीगल फर्म को उनके भाई मेजर (रिटायर्ड) विक्रांत जेटली का केस लड़ने की अनुमति दी गई है। विक्रांत जेटली पिछले करीब 18 महीनों से दुबई में हिरासत में हैं और इस फैसले को परिवार के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है।

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दिल्ली HC के आदेश पर सेलिना जेटली ने तोड़ी चुप्पी

सेलिना जेटली ने ANI से बातचीत में कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट के इस आदेश ने उनके परिवार में एक नई उम्मीद जगा दी है। कोर्ट के निर्देश के बाद अब UAE में अल मारी पार्टनर्स नाम की लीगल फर्म उनके भाई का कानूनी पक्ष रख सकेगी। सेलिना ने इसे अपने भाई और देश के एक पूर्व सैनिक की इज्जत की वापसी बताया है। सेलिना जेटली ने आगे कहा, 'ये हमारे लिए 18 महीने की लंबी और कठिन लड़ाई रही है। आज इतने समय बाद हमें लग रहा है कि न्याय की दिशा में एक ठोस कदम बढ़ा है। कोर्ट के आदेश से अब सही तरीके से मेरे भाई का बचाव हो पाएगा और हमें उम्मीद है कि वे जल्द ही घर लौटेंगे।'

इतना ही नहीं, इस मामले में मेजर विक्रांत जेटली के वकील एडवोकेट राघव कक्कड़ ने भी हाई कोर्ट के आदेश को बेहद सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने विदेश मंत्रालय (MEA) को निर्देश दिया है कि वो दुबई में परिवार के जरिए चुनी गई लीगल फर्म को आधिकारिक रूप से अपॉइंट करे। इससे लीगल टीम को विक्रांत जेटली से पावर ऑफ अटॉर्नी लेने और केस की प्रभावी पैरवी शुरू करने में मदद मिलेगी।

हमारे सैनिक की रिहाई का रास्ता अब भी सरल होगा

इस पर राघव कक्कड़ ने कहा, ''आदेश के बाद अब लीगल फर्म औपचारिक रूप से विक्रांत को रिप्रेजेंट कर सकेगी। भारत और UAE के बीच हालिया समझौतों को देखते हुए हमें पूरी उम्मीद है कि हमारे सैनिक की रिहाई का रास्ता अब भी सरल होगा।'' दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने सेलिना जेटली की याचिका पर सुनवाई करते हुए MEA को साफ निर्देश दिए कि अल मारी पार्टनर्स को दुबई और अबू धाबी में विक्रांत जेटली का प्रतिनिधित्व करने की अनुमति दी जाए। ये भी सामने आया है कि ये लीगल फर्म इस केस को प्रो बोनो यानी मुफ्त में लड़ने को तैयार है।

अब कोर्ट ने भी कहा है कि अगर आदेश लागू करने में किसी तरह की परेशानी आती है, तो उसे हलफनामे के जरिए अदालत के सामने रखा जाए। इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 10 फरवरी तय की गई है। विक्रांत जेटली पिछले 18 महीनों से UAE में हिरासत में हैं। इस केस को लेकर MEA की ओर से कुछ आपत्तियां भी रखी गईं, लेकिन सेलिना जेटली के वकीलों ने उनका विरोध किया और कहा कि परिवार की ओर से चुनी गई लीगल फर्म ही इस मामले में सही तरीके से पैरवी कर सकती है। फिलहाल, दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले को सेलिना जेटली और उनके परिवार के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है।

Published on:
04 Feb 2026 01:42 pm
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