विवेक अग्निहोत्री के निर्देशन में बनी द कश्मीर फाइल्स में दर्शन कुमार एक संघर्षरत कश्मीरी पंडित की भूमिका निभा रहे हैं, जो अपने माता-पिता और भाई की मौत के पीछे की सच्चाई का पता लगाने की कोशिश कर रहा है. फिल्म में अपने किरदार को लेकर दर्शन कुमार कहना है कि उनके लिए फिल्म की शूटिंग आसान नहीं थी।
निर्देशक विवेक अग्निहोत्री (Vivek Agnihotri) की ‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files) इन दिनों पूरे देश में छाई हुई है। दर्शकों से इस फिल्म को खूब प्यार मिल रहा है। कई बड़ी फिल्मों को टक्कर देने के साथ ही फिल्म कई रिकॉर्ड कायम करती भी नजर आ रही है। दर्शकों से मिल रहे प्यार को देखकर फिल्म की स्टारकास्ट भी काफी खुश है। फिल्म में दर्शन कुमार (Darshan Kumar) भी कश्मीरी पंडित के किरदार में हैं, जिन्होंने अब तक द फैमिली मैन सीरीज, मैरी कॉम, एनएच10 (NH10) और सरबजीत जैसी फिल्मों में चैलेंजिंग रोल किए हैं। लेकिन, दर्शन कुमार का कहना है कि अब तक की फिल्मों में उनके लिए ‘द कश्मीर फाइल्स’ में उनका किरदार सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण रहा।
द कश्मीर फाइल्स में कृष्णा पंडित का रोल निभाने वाले दर्शन कुमार के दिमाग पर इतना गहरा असर पड़ा कि वो डिप्रेशन में आकर अकेले में बड़बड़ाने लगते थे। रात में नींद से उठकर बैठ जाते थे। फिल्म साइन करने से लेकर, इसे शूट करने तक दर्शन का सफर काफी दर्दनाक रहा है।
दर्शन कुमार ने बताया कि ''मुझे कास्टिंग डायरेक्टर तरण बजाज का कॉल आया कि विवेक रंजन मुझे फिल्म में लीड रोल देना चाहते हैं। मैं विवेक और पल्लवी जी से मिला। उन्होंने मुझे तकरीबन एक घंटे का वीडियो दिखाया, जिसे उन्होंने देश-दुनिया में घूमकर पीड़ितों के वीडियो बनाए थे। उसे देखकर मैं सन्न रह गया, कुछ बोल नहीं पाया। उन्होंने कहा कि आपकी कंडीशन समझ सकता हूं। एक काम कीजिए, आप स्क्रिप्ट लेकर जाइए और पढ़कर फैसला लीजिए। स्किप्ट में जो-जो बातें और दर्द लोगों ने बयां किया है, उन चीजों को डायलॉग में पिरोकर रखा गया है। इस फिल्म को करने का यही मेरा मेन रीजन रहा''।
दर्शन कुमार ने आगे बताया कि '' जैसे ही वीडियो स्टार्ट हुआ, पहले ही सीन देखकर मैं रोने लग गया था। कई फैमिली अपने बारे में बता रही थी। एक जगह पति को मारकर खून से सने चावल को उसकी पत्नी को खिलाया गया, जिसे देखकर दिल दहल गया। स्क्रिप्ट पढ़ने से लेकर फिल्म करने तक, दो महीने की जर्नी रही। मैं जिस दिन वीडियो देखा था, उस रात को बिल्कुल सो ही नहीं पाया। मैंने स्क्रिप्ट भी पढ़ी थी। वहां से लेकर फिल्म करने तक मुझे याद नहीं कि किसी रात को ढंग से सो पाया हूं। कई बार ऐसा हुआ कि मैं खुद से बड़बड़ाने लग गया था। मुझे लगा कि मैं डिप्रेशन में जा रहा हूं। मैं छोटी-सी बात पर इरिटेट हो जाता था। किसी को कुछ भी बोल देता था''।
उन्होंने आगे कहा- ‘मैं बहुत लो महसूस करने लगा। यहां तक कि जब मैं एक होटल में रहकर आराम कर रहा था, तब भी मैंने अपने किरदार को जीने की कोशिश की। जब मैं इस फिल्म की शूटिंग कर रहा था, रातों में सोता नहीं था। फिल्म की शूटिंग खत्म करने के बाद मैंने हफ्तों मेडिटेशन किया, क्योंकि मैं इससे बाहर आना चाहता था। तो इसने मुझ पर बहुत असर किया। लेकिन, अब फिल्म को जो रिस्पॉन्स मिल रहा है उसे देखकर मुझे लग रहा है कि मैंने जो कुछ सहा मुझे उसकी कीमत मिल गई है।