
Hanuman Ansh 5 miracle: बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ‘हनुमान अंश’ हर दिन इतिहास रच रही है। फिल्म न केवल अपनी अनूठी कहानी और कम बजट के लिए सराही जा रही है, बल्कि फिल्म में दिखाए गए बाबा के अलौकिक चमत्कारों ने दर्शकों को हैरान और भावुक दोनों कर दिया है। भक्ति, आस्था और वैराग्य के संगम से सजी इस फिल्म में दिखाए गए 5 प्रमुख चमत्कार दर्शकों के बीच चर्चा का सबसे बड़ा विषय बने हुए हैं।
फिल्म हनुमान अंश में एक बेहद भावुक दृश्य है, जिसमें नीम करौरी बाबा से प्रेरित मुख्य पात्र ट्रेन में बैठे होते हैं और राम का भजन कर रहे होते हैं। तब ही फर्स्ट AC कोच में बैठे अग्रेंजी अधिकारी TT को उन्हें नीचे उतारने के लिए कहते हैं और वह उन्हें धक्का देकर नीचे उतार देते हैं। जैसे ही बाबा उतरते हैं ट्रेन आगे ही नहीं चलती। लाख कोशिश करने के बावजूद ट्रेन पटरी पर खड़ी रहती है। इसके बाद अधिकारी खुद आकर बाहर बैठे बाबा से माफी मांगते हैं और उन्हें फिर से अंदर आने के लिए कहते हैं। जिसके बाद ट्रेन चलती है।
फिल्म में एक ऐसा सीन दिखाया गया है। जिसमें जेल का बड़ा ताल खुद-ब-खुद टूट जाता है। जब बाबा को रात में पकड़कर बैरक में रखा जाता है तो वह बार-बार खुद बिना लॉक खोले अंदर बाहर आते जाते हैं। जिसे पुलिसकर्मी देखकर डर जाते हैं और पूरी कहानी जेलर को बताते हैं। वह सुबह आकर जब खुद देखता है तो वह भी हैरान रह जाता है। वह बाबा को नमन करता है और उन्हें खाने पर आमंत्रित करता है।
फिल्म में भारतीय नारी के पतिव्रता धर्म और अटूट साहस का अद्भुत चित्रण दिखाया गया है। एक दृश्य में एक महिला को देखकर बाबा कहते हैं कि तुम थोड़ी देर में विधवा होने वाली हो। तुम्हारा पति अभी पानी पीने के लिए उठेगा और उसे सांप काट लेगा ये सुनकर वह रोने लगती है और अपनी जान देने की कोशिश करती है। तब बाबा उसे कहते हैं कि जाकर अपने सुहाग को बचाओ। वह भागती है और अपने पति की जान बचा लेती है।
यह दृश्य फिल्म के सबसे हैरान कर देने वाले चमत्कारों में से एक है। जब एक पात्र की सत्यनिष्ठा और साधना की परीक्षा ली जाती है। फिल्म में बाबा की पत्नी उनसे घर में रहने को कहती हैं। ऐसे में बाबा उन्हें अपनी बात समझाते हुए एक उदाहरण देते हैं। वह कुछ पीली सरसों लेते हैं और उन्हें जीभ पर रखते हैं थोड़ी देर में जीभ पर सरसों के छोटी डालियां उग आती हैं। जिसे देखकर उनकी पत्नी रोने लगती हैं और भागकर कंबल और लौटा लेकर आती है और उन्हें जाने की अनुमति दे देती है।
फिल्म में प्रकृति के साथ एकाकार होने के भाव को बहुत ही सुंदरता से पिरोया गया है। इसमें बाबा जब छोटे होते हैं तो वह जंगलों में चिड़ियों, पक्षियों और हरे-भरे पेड़ों से इंसानों की तरह बात करते हैं। पेड़ उन्हें सालों पुरानी अपनी वीरता की कहानी सुनाते हैं।