
मुंबई। बाॅलीवुड फिल्ममेकर सुभाष घई ( Subhash Ghai ) का जन्मदिन 24 जनवरी को है। घई जन्मदिन से तीन दिन पहले सिंगिंग रियलिटी शो ’इंडियन आइडल’ ( Indian Idol ) के सेट पर गेस्ट के रूप में पहुंचे। इस शो का प्रसारण 23 जनवरी की रात को किया गया। शो में घई ने प्रतियोगियों को कई गुर सिखाए और साथ ही उनकी फिल्मों के गानों से जुड़े रोचक किस्से भी सुनाए। इनमें से एक किस्सा था फिल्म ’राम लखन’ ( Ram Lakhan Movie ) के साॅन्ग ’बड़ा दुख दीना तेरे लखन ने...’ से जुड़ा हुआ।
सरोज खान को दी कोरियाग्राफी की जिम्मेदारी
दरअसल, ’इंडियन आइडल’ की कंटेस्टेंट अरुणिता ने अपनी प्रस्तुति के लिए ’राम लखन’ के साॅन्ग ’बड़ा दुख दीना तेरे लखन ने...’ को चुना। ये गाना उन्होंने बहुत ही बेहतरीन ढंग से गाया। प्रस्तुति के बाद सुभाष घई ने इस गाने से जुड़ा किस्सा सुनाया। घई ने बताया कि ये गाना सरोज खान ( Saroj Khan ) को कोरियोग्राफ करने को कहा गया। उन्होंने सरोज से कहा कि माधुरी नई लड़की है। इस गाने पर मैं मुजरा देखना चाहता हूं। सरोज इससे इतना प्रभावित हुईं कि दिन में दो बार और रात में भी फोन कर इसकी तारीफ की। जब गाने की कोरियोग्राफी हो गई, तो सरोज खान ने घई को डांस देखने को बुलाया।
'थोड़ा लाज-शर्म गाने में दिखनी चाहिए'
सुभाष घई बताते हैं कि जब वह कोरियोग्राफी देखने पहुंचे, तो उनके सामने 40 बैक ग्राउण्ड डांसर्स के साथ प्रस्तुति हुई। इसे देख उन्होंने सरोज खान से कहा,’ये क्या आपने तो इसे मुजरा बना दिया। मुजरा नहीं बनाना था।’ सरोज ने जवाब दिया,’आपने ही तो बोला था।’ इस पर घई बोले कि यह गाना उस तरह का है ही नहीं कि उस पर मुजरा किया जाए, थोड़ा लाज-शर्म गाने में दिखनी चाहिए।’ यह सुनकर सरोज खान नाराज हो गईं और सेट छोड़कर सीधे कैंटीन चली गईं। अगले दो दिन वह सेट पर नहीं आईं। वह आतीं और कैंटीन में बैठ जातीं। इसके चलते घई ने गाने का मुखड़ा खुद कोरियाग्राफ किया। इसमें माधुरी को डांसर्स के बीच घूंघट में बैठ जाने को कहा। माधुरी की आंखों के एक्सप्रेशन से पहला शाॅट लिया गया। इसके बाद सरोज खान से बाकी गाना कोरियोग्राफ करवाया गया।
’इंडियन आइडल’ शो पर भी सुभाष घई ने अरुणिता को माधुरी वाला एक्सप्रेशन डायरेक्ट किया। खुद घई ने वही एक्सप्रेशन करके दिखाए। उनको देख अरुणिता ने भी वैसा ही किया। इसके साथ ही घई ने बताया कि गाने को वह लता मंगेशकर से गवाना चाहते थे। इसके लिए लता जी के पीछे 3 महीने पड़े रहे। तब जाकर लता जी ने हां कि और गाना गाया।