दिवंगत इरफान खान ( Irrfan khan ) के बेटे बाबिल ( Babil Khan ) ने पिता को याद करते हुए इंस्टाग्राम ( Shared Childhood photos with father ) पर बचपन की तस्वीरें की शेयर पोस्ट में नेपोटिज्म ( Babil Speak about Nepotism ) के लिए हिंदी सिनेमा जगत को ठहराया दोषी
नई दिल्ली। साल 2020 में बॉलीवुड ( Lost many bollywood stars in 2020 ) ने कई दिग्गज कलाकारों को खो दिया है। एक के बाद एक कई सितारों ने दुनिया को अलविदा कह दिया। 29 अप्रैल को शानदार अभिनेता इरफान खान ( Irrfan Khan ) ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। इरफान का इस तरहा से जाना हिंदी सिनेमा ( Hindi Cinema ) के लिए एक बहुत बड़ा झटका था। इरफान के निधन के बाद से ही उनके बेटे बाबिल ( Irrfan son Babil Khan ) सोशल मीडिया पर अक्सर अपने पिता के साथ बिताए पलों को याद कर उन्हें उनके प्रशंसकों संग भी शेयर करते हैं। लेकिन इस बीच बाबिल ( Babil Shared new post ) ने एक पोस्ट शेयर किया है। जिसमें उन्होंने इन दिनों बॉलीवुड में गरमाए मुद्दे नेपोटिज्म ( Babil wrote about Nepotism ) को लेकर बात कही। साथ बताया कि उनके पिता इरफान इंडस्ट्री में किस बात के सामने हार मान गए थे।
बाबिल ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट ( Babil Instagram Account ) अपने पिता इरफान खान संग बचपन की दो थ्रोबैक ( Babil Shared chilhood throwback photos ) तस्वीरें पोस्ट की हैं। इन तस्वीरों में से एक में छोटे बाबिल अपने पिता के साथ नजर आ रहे हैं तो वहीं दूसरी तस्वीर में इरफान खान लेटे हुए हैं। फोटोज को शेयर करते हुए बाबिल ने कैप्शन ( Kabil instagram caption ) में पिता को लेकर एक किस्सा भी शेयर किया। बाबिल लिखते हैं कि 'क्या आपको मालूम है कि मेरे पिता ने मुझे सिनेमा का छात्र होने के नाते सबसे जरूरी चीज क्या सिखाई थी?' फिल्म स्कूल जाने से पहले इरफान ने बाबिल ( Irrfan warns Babil ) को चेतावनी दी थी कि उन्होंने खुद ही खुद को साबित करना होगा क्योंकि बॉलीवुड दुनिया के सिनेमा में कभी-कभी सम्मानित किया जाता है। तो ऐसे में उन्हें भारतीय सिनेमा के बारे में कुछ बताना चाहिए, जो बॉलीवुड के कंट्रोल से परे है। बाबिल ने बताया उनकी क्लास में भी बॉलीवुड के लिए कोई रिस्पेक्ट ( No Respect for bollywood ) नहीं थी क्योंकि हिंदी सिनेमा को लेकर कोई जागरूकता नहीं थी।
बाबिल ने बताया कि 'भारतीय सिनेमा के बारे में विश्व सिनेमा सेगमेंट ( Only one lecture for indian cinema ) में सिर्फ एक ही लेक्चर था, जिसे- बॉलीवुड एंड बियांड ( Bollywood end and beyond ) कहा गया, जो क्लास में सिर्फ मजाक बनकर रह गया। 'सत्यजीत रे' ( Director Satyajit Ray ) और 'के आसिफ' ( Director K Asif ) के भारतीय सिनेमा के बारे में बातचीत करना भी काफी कठिन था। इस बात की वजह बताते हुए उन्होंने बताया कि सिनेमा जगत के लोगों ने भारतीय दर्शकों ( Indian Viewers ) के तौर पर खुद को विकसित करने से मना कर दिया।' बाबिल ने आगे अपने पिता के संघर्ष के बारे में लिखते हुए कहा कि 'उनके पिता ने बॉलीवुड के मुश्किल हालात में भी अभिनय की कला के समझाने के लिए पूरी जिंदगी लगा दी लेकिन वो कई सालों तक बॉक्स ऑफिस पर 6 पैक्स एब्स वाले हीरो से हारते रहे। फिजिक्स के नियमों को चुनौती देने वालों से, फोटोशॉप्ड आइटम्स सॉन्ग्स से, सेक्सिजम ( sexism ) से और भाईवाद ( Nepotism ) की उसी पुरानी परंपरा के आगे वह अक्सर हार जाते थे।'
इस पोस्ट में बाबिल ने अभिनेत्री कल्कि ( Babil gave example Kalki koechlin ) का उदाहरण देते हुए बताया कि 'जब कल्कि को बाल छोटे करने पर एक लड़के की तरह दिखने के लिए ट्रोल ( Troll for kalki shorts hair ) किया गया था। तो उस समय उन्हें बहुत बुरा लगा था। बाल काट लेने की वजह किसी की क्षमताओं को दबा देने का एक यह उचित उदाहरण है।' बाबिल ने अपने इस पोस्ट में आखिर में लिखते हुए कहा कि 'हालांकि उन्हें लगता है कि अब सुशांत की मौत को लोगों ने एक पॉलिटिकल ( Sushant's death has become a political issue ) मुद्दा बना दिया है। पर इससे अगर पॉजिटिव चेंज ( Positive Change ) आता है, तो अच्छा ही है। सुशांत के निधन ( Sushant Singh Rajput Death ) के समय भी पोस्ट किया था। साथ ही बाबिल ने नेपोटिज्म और सुशांत के देहांत को लेकर अपने पिता के प्रंशसक और खुद के चाहने वालों के लिए इस पूरे ही मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया रखी।