
Women Police Characters in Bollywood: 18 सितंबर को करीना कपूर खान और पृथ्वीराज सुकुमारन की फिल्म ‘दायरा’ सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। मेघना गुलजार के निर्देशन में बनी यह फिल्म अपराध, कानून, न्याय और जवाबदेही के बीच की उथल-पुथल को सामने रखती है। फिल्म में करीना डीसीपी अजूनी कोहली, जबकि पृथ्वीराज डीसीपी रमन कुमार के किरदार में हैं। दोनों एक ही मामले को लेकर अलग-अलग सोच रखते हैं और यहीं से कहानी में टकराव शुरू होता है।
फिल्म के ट्रेलर में करीना को एक सख्त पुलिस ऑफिसर के रूप में नजर आ रही हैं, जो एक विवादित पुलिस मुठभेड़ की जांच करती हैं। वहीं, रमन कुमार कानून और अपराध को लेकर अपने अलग नजरिए पर कायम दिखाई देते हैं। फिल्म की कहानी यह सवाल भी उठाती है कि अपराध और सजा के बीच कानून की सीमा कहां तक है?
लेकिन ‘दायरा’ में करीना कपूर का पुलिस अधिकारी बनना सिर्फ एक नया किरदार नहीं है। दायरा यह उस बदलाव की भी कहानी है, जो पिछले 10 सालों में फिल्मों और वेब सीरीज की महिला पुलिस अधिकारियों के किरदारों में आया है। कभी महिला पुलिस को मजबूत दिखाने के लिए उसे ‘मर्दों जैसा’ दिखाना जरूरी समझा जाता था। अब वही महिला कॉप मां भी है, बेटी भी, पत्नी भी और अपने निजी संघर्षों के साथ एक अधिकारी भी।
साल 2014 में रानी मुखर्जी की ‘मर्दानी’ आई और महिला पुलिस अधिकारी को लेकर हिंदी फिल्मों में एक अलग तरह की चर्चा शुरू हुई। रानी ने फिल्म में क्राइम ब्रांच की अधिकारी शिवानी शिवाजी रॉय का किरदार निभाया था। वह एक लड़की की गुमशुदगी की जांच करते हुए मानव तस्करी के बड़े नेटवर्क तक पहुंचती हैं। खास बात यह थी कि फिल्म में शिवानी किसी पुरुष हीरो की मदद करने वाला किरदार नहीं थीं, बल्कि वही कहानी की लीड हीरो थीं। वो अपराधियों से भिड़ती है, फैसले लेती है और पूरी जांच को आगे बढ़ाती है। इसके बाद ‘मर्दानी 2’ और साल 2026 में आई मर्दानी 3 में भी एक सशक्त महिला पुलिस के किरदार में रानी मुखर्जी नजर आयीं। इस कहानी का सबसे बड़ा बदलाव ये था कि महिला पुलिस अधिकारी अब सिर्फ ‘लेडी पुलिस’ नहीं थी। वह कहानी की कमान भी संभाल सकती थी।
साल 2015 में आई ‘दृश्यम’ में तब्बू ने आईजी मीरा देशमुख का किरदार निभाया। यहां महिला कॉप की ताकत उसकी शारीरिक क्षमता से ज्यादा उसकी जांच और सवाल पूछने की क्षमता में दिखाई गई। मीरा देशमुख लगातार सुराग तलाशती हैं और परिवार के बयानों में छिपी कड़ियों को जोड़ने की कोशिश करती हैं।
यानी महिला अधिकारी को मजबूत दिखाने के लिए हर बार उसे एक्शन करते दिखाना जरूरी नहीं था। उसका दिमाग भी उसका हथियार हो सकता है।
फिर आया ‘दिल्ली क्राइम’ का दौर। शेफाली शाह ने डीसीपी वर्तिका चतुर्वेदी का किरदार निभाया। इस किरदार में सबसे खास बात यह थी कि वर्तिका को बार-बार ‘महिला पुलिस अधिकारी’ साबित करने की कोशिश नहीं की गई। वह पहले एक अधिकारी हैं, जो अपनी टीम के साथ एक मुश्किल मामले को सुलझाने में लगी हैं। लेकिन इसके साथ उनकी निजी जिंदगी, परिवार और भावनात्मक दबाव भी कहानी का हिस्सा बने। यही वजह है कि महिला कॉप का किरदार एक नए स्तर पर पहुंचा।
रवीना टंडन ने ‘अरण्यक’ में पुलिस अधिकारी कस्तूरी डोगरा का किरदार निभाया। कस्तूरी सिर्फ अपराध की जांच करने वाली पुलिस अधिकारी नहीं थीं। उनकी जिंदगी में परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियां भी थीं, यानी कहानी ने यह दिखाने की कोशिश की कि पुलिस की नौकरी करने वाली महिला की जिंदगी थाने की चारदीवारी के बाहर भी चलती है।
महिला पुलिस अधिकारियों की दुनिया सिर्फ बड़े शहरों और बड़े अपराधों तक सीमित नहीं रही। ‘कठल’ में सान्या मल्होत्रा ने इंस्पेक्टर महिमा बसोर का किरदार निभाया। एक अजीब से दिखने वाले मामले की जांच करते-करते कहानी कहीं ज्यादा गंभीर मुद्दे तक पहुंचती है।
वहीं ‘दहाड़’ में सोनाक्षी सिन्हा ने सब-इंस्पेक्टर अंजलि भाटी का किरदार निभाया। यहां महिला अधिकारी को सामाजिक और जातिगत पूर्वाग्रहों से भी जूझते दिखाया गया। इन कहानियों में महिला पुलिस का संघर्ष सिर्फ अपराधियों के साथ नहीं है। उसे सिस्टम और समाज के भीतर मौजूद मुश्किलों का भी सामना करना पड़ता है।
साल 2024 की ‘दो पत्ती’ में काजोल ने पहली बार पुलिस अधिकारी का किरदार निभाया। उन्होंने इंस्पेक्टर विद्या ज्योति का रोल किया। फिल्म में पुलिस जांच घरेलू हिंसा और दो बहनों की कहानी से जुड़ती है। यहां भी पुलिस अधिकारी का किरदार सिर्फ एक्शन तक सीमित नहीं था। वह सवाल करती है, लोगों से पूछताछ करती है और मामले की परतें खोलती है। यानी अब महिला कॉप के किरदारों में जांच, संवेदना और सामाजिक मुद्दों के लिए भी जगह है।
करीना कपूर खान के लिए पुलिस की वर्दी बिल्कुल नई नहीं है। 2024 में वह ‘द बकिंघम मर्डर्स’ में पुलिस अधिकारी जस भामरा के किरदार में नजर आई थीं। यह किरदार उनकी आम ग्लैमरस स्क्रीन छवि से बिल्कुल अलग था। अब ‘दायरा’ में वह फिर पुलिस अधिकारी बनी हैं, लेकिन इस बार कहानी का दायरा और बड़ा है। डीसीपी अजूनी कोहली के सामने सिर्फ अपराध सुलझाने की चुनौती नहीं है। उनके सामने कानून, न्याय और पुलिस की जवाबदेही के बीच संतुलन का सवाल भी है। और यही चीज ‘दायरा’ को पिछले कुछ सालों के महिला कॉप किरदारों की अगली कड़ी बनाती है।
‘दायरा’ की खास बात यह है कि यहां करीना की अजूनी कोहली सिर्फ अपराधी का पीछा करने वाली पुलिस अधिकारी नहीं हैं। वह एक ऐसे मामले के बीच खड़ी हैं जहां कानून और न्याय की अलग-अलग व्याख्या सामने आती हैं। फिल्म के ट्रेलर में अजूनी और रमन कुमार इसी मुद्दे पर अलग-अलग नजरिए रखते दिखाई देते हैं। मेघना गुलजार की फिल्म का एंगल भी इसी पर है, जहां हर सवाल का जवाब सिर्फ सही या गलत में नहीं मिलता।
18 सितंबर को जब ‘दायरा’ सिनेमाघरों में आएगी, तब यह देखना दिलचस्प होगा कि करीना की यह पुलिस अधिकारी वाली भूमिका महिला कॉप के इस बदलते सफर में कौन-सी नई परत जोड़ती है। कई कहानियों में महिला कॉप को ‘सख्त’, ‘निडर’ और ‘मर्दों से ज्यादा मजबूत’ दिखाने पर जोर रहता है। यानी ताकत को आज भी कई बार गुस्से और कठोरता से जोड़ दिया जाता है।