
Nana Patekar Elder Son Death: नाना पाटेकर ने पर्दे पर कई ऐसे किरदार निभाए, जिनमें गुस्सा, दर्द और भावनाओं की गहराई साफ नजर आती थी। लेकिन उनकी निजी जिंदगी में भी एक ऐसा दर्द था, जिसने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया था। नाना पाटेकर ने अपने बड़े बेटे दुर्वासा को महज ढाई साल की उम्र में खो दिया था। बेटे की मौत का सदमा इतना गहरा था कि एक समय वह दिनभर में करीब 60 सिगरेट तक पीने लगे थे।
नाना पाटेकर ने एक इंटरव्यू में अपने बेटे दुर्वासा के बारे में खुलकर बात की थी। उन्होंने बताया था कि उनका बेटा जन्म से ही बीमार था और उसे कई स्वास्थ्य समस्याएं थीं। उसकी एक आंख में भी परेशानी थी और उसे दिखाई नहीं देता था।
नाना ने स्वीकार किया था कि जब उन्होंने पहली बार अपने बेटे की हालत देखी तो उनके मन में एक पिता की चिंता से पहले यह ख्याल आया कि लोग उनके बेटे को देखकर क्या सोचेंगे। बाद में उन्हें इस बात का पछतावा हुआ कि उस वक्त उन्होंने बेटे के दर्द को समझने के बजाय लोगों की सोच की ज्यादा चिंता की।
नाना ने बताया था कि उनका बेटा दुर्वासा करीब ढाई साल तक उनके साथ रहा। उन्होंने कहा था कि जिंदगी में कुछ चीजें इंसान के हाथ में नहीं होतीं और बेटे को खोना उनके लिए बेहद मुश्किल अनुभव था।
उन्होंने यह भी बताया था कि उन्होंने बेटे का नाम ऋषि दुर्वासा के नाम पर रखा था, जिन्हें भारतीय पौराणिक कथाओं में अपने क्रोध के लिए जाना जाता है।
दुर्वासा की मौत के बाद नाना पाटेकर बुरी तरह टूट गए थे। उन्होंने बताया था कि उस दौर में वह दिन में करीब 60 सिगरेट पीने लगे थे। हालात इतने खराब हो गए थे कि वह नहाते समय भी सिगरेट पीते थे।
नाना ने बताया था कि सिगरेट की बदबू की वजह से लोग उनकी कार में बैठने से भी कतराते थे। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्होंने कभी शराब नहीं पी, लेकिन उस समय स्मोकिंग उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गई थी।
नाना ने बताया था कि एक दिन उनकी बहन ने उनसे सवाल किया कि अब वह और क्या देखना चाहते हैं। बहन की यह बात उन्हें अंदर तक छू गई। उन्होंने बताया था कि उसी दिन के बाद उन्होंने सिगरेट छोड़ने का फैसला कर लिया।
दुर्वासा की मौत का दर्द नाना पाटेकर के जीवन का ऐसा अध्याय रहा, जिसे वह कभी भुला नहीं सके। पर्दे पर मजबूत नजर आने वाले अभिनेता के पीछे एक ऐसा पिता भी था, जिसने अपने छोटे से बेटे को खोने का गम जिंदगीभर अपने भीतर संभालकर रखा।