Rajesh Khanna: फिल्ममेकर आर. बाल्की ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना के अंतिम दिनों को याद किया और बताया कि आखिरी समय में भी उनका हाल कैसा था। वह कैसे दिखने लगे थे, जिस एक्टर पर लाखों लड़किया मरती थीं…
Rajesh Khanna Last Ad Film: राजेश खन्ना भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के पहले सुपरस्टार माने जाते हैं। उनके बारे में अनगिनत किस्से मशहूर हैं, कभी उनके लिए दर्शकों की दीवानगी के तो कभी उनकी फिल्मों की रिकॉर्डतोड़ कमाई के। कहा जाता है कि लड़कियां उनके लिए खून से खत लिखा करती थीं और उनकी हर फिल्म पर दर्शकों का बेहिसाब प्यार बरसता था।
राजेश खन्ना के जीवन से जुड़ी कई चर्चित कहानियां आज भी लोगों को याद हैं। शुरुआती करियर में लगातार 15 हिट फिल्मों का रिकॉर्ड, उनके लिए मशहूर कहावत ‘ऊपर आका, नीचे काका’, सुपरस्टारडम के शिखर पर पहुंचने के बाद अकेलेपन का दौर और फिर राजनीति में कदम रखने की उनकी यात्रा। ये सभी किस्से उनके अन्मैचेड स्टारडम और निजी जीवन के उतार-चढ़ाव को दर्शाती है। फिल्म ‘आराधना’ से शुरू हुआ उनका ‘काका’ युग और ‘अमर प्रेम’ जैसी फिल्मों में उनकी यादगार एक्टिंग आज भी सिनेमा प्रेमियों के दिलों में बसी हुई है।
अब फिल्ममेकर आर. बाल्की, जिन्होंने राजेश खन्ना को उनकी आखिरी स्क्रीन प्रेजेंस में डायरेक्ट किया था, ने उनके साथ जुड़े अपने निजी और शूटिंग के अनुभव शेयर किए हैं। वैसे तो राजेश खन्ना की आखिरी फीचर फिल्म 'रियासत' थी, लेकिन ऑफिशियली उन्होंने आखिरी बार कैमरे का सामना आर. बाल्की द्वारा निर्देशित एक एड फिल्म के लिए किया था।
यह एड फिल्म एक कंज्यूमर गुड्स कंपनी के पंखों के लिए था। इस शूट के कुछ महीनों बाद ही राजेश खन्ना का निधन हो गया और यह एड फिल्म उनके देहांत के बाद रिलीज हुई।
आर. बाल्की ने ‘मामराजी’ यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में इस शूट के बारे में विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि अपने आखिरी दिनों में भी राजेश खन्ना उतने ही प्रोफेशनल, समर्पित, मेहनती और हंसमुख थे, जितने वे अपने करियर के शिखर पर हुआ करते थे।
यह एड फिल्म जो 2012 में उनके निधन के बाद रिलीज हुई, राजेश खन्ना और उनके फैंस की यादों के इर्द-गिर्द घूमती है। विज्ञापन में वह कहते हैं कि भले ही अब उनके फैंस उनके साथ नहीं हैं, लेकिन उनके पास ‘हैवेल्स फैन’ तो हैं। इसके बाद बैकग्राउंड में सीलिंग फैन और टेबल फैन चलते नजर आते हैं और राजेश खन्ना अपनी आइकॉनिक फिल्म ‘कटी पतंग’ (1970) के मशहूर गीत ' ये शाम मस्तानी' की धुन सीटी में बजाते दिखाई देते हैं।
बाल्की ने आगे बताया कि जब उन्होंने इस एड फिल्म की स्क्रिप्ट राजेश खन्ना को सुनाई, तो इसमें उनके जीवन की उस सच्चाई को ह्यूमर के साथ बताया गया था कि अब उनके फैंस उनसे दूर हो चुके हैं। इस पर राजेश खन्ना ने मुस्कुराते हुए कहा,“बाबू मोशाय, क्या आपको लगता है कि अगर मुझमें सेंस ऑफ ह्यूमर नहीं होता, तो मैं सुपरस्टार बन पाता?”
जब इस एड फिल्म का शूट हुआ, उस समय राजेश खन्ना की सेहत काफी गिर चुकी थी। बाल्की याद करते हुए बताते हैं, “वह बहुत तकलीफ में थे। हम बैंगलोर में शूटिंग कर रहे थे। उन्हें एयर एंबुलेंस से लाया गया था। एक हाथ में आईवी ड्रिप लगी हुई थी। वे व्हीलचेयर पर सेट पर आए। थोड़ी देर के लिए खड़े हो पाते थे, ड्रिप हटाई जाती थी और लगभग 45 सेकंड तक शूट कर पाते थे, उसके बाद उन्हें वापस जाना पड़ता था।”
बाल्की ने बताया उनके के लिए यह शूट बेहद इमोशनल था, क्योंकि उन्होंने राजेश खन्ना को उनकी जिंदगी की सबसे कमजोर हालत में देखा। बहुत दुबले और बेहद नाजुक। उन्हें यह एहसास हो गया था कि उनके पास अब ज्यादा समय नहीं बचा है।
राजेश खन्ना की निधन को इस जुलाई में 14 साल हो जाएंगे, लेकिन उनके फैंस आज भी उन्हें भूले नहीं हैं। उनके गाने, उनकी स्टाइल और उनका अंदाज आज भी लोगों को उतना ही आकर्षित करता है। राजेश खन्ना को हमेशा भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार के रूप में याद किया जाएगा।