
Sameer Anjaan Dhurandhar: बॉलीवुड में पुराने गानों को नए अंदाज में पेश करने का चलन काफी पुराना है। कई बार रीक्रिएट किए गए गाने नई पीढ़ी के बीच लोकप्रिय हो जाते हैं, लेकिन जब किसी पुराने गीत का इस्तेमाल उसके मूल भाव से बिल्कुल अलग तरीके से किया जाता है तो सवाल भी उठते हैं। अब मशहूर गीतकार समीर अंजान ने फिल्मों में संगीत के बदलते अंदाज और पुराने गानों के इस्तेमाल को लेकर खुलकर नाराजगी जताई है। उन्होंने फिल्ममेकर आदित्य धर की 'धुरंधर' फ्रैंचाइजी और अजय देवगन की आने वाली फिल्म 'चौहान' के टीजर को लेकर भी अपनी आपत्ति जाहिर की।
समीर अंजान ने कोमल नाहटा के पॉडकास्ट 'गेम चेंजर्स' में बातचीत के दौरान कहा कि पुराने गानों को दोबारा बनाना अपने आप में गलत नहीं है। उनका मानना है कि किसी पुराने गीत को नए अंदाज में पेश करने से वह नई पीढ़ी तक पहुंच सकता है। उन्होंने अपने ही गाने 'दिलबर' का उदाहरण देते हुए कहा कि रीक्रिएशन के बाद यह गीत जेनरेशन जेड के बीच दोबारा लोकप्रिय हुआ।
हालांकि, उनकी परेशानी तब होती है जब मूल गीतकार की रचना को बदलकर उसका मूल भाव ही खत्म कर दिया जाता है। समीर के मुताबिक साहित्य और गीत के साथ प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन उसकी आत्मा को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।
समीर अंजान ने 'धुरंधर' में पुराने गानों को एक्शन सीन के दौरान बैकग्राउंड में इस्तेमाल किए जाने पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने खास तौर पर अपने गीत 'हम प्यार करने वाले, दुनिया से ना डरने वाले' के नए इस्तेमाल का जिक्र किया। उनका सवाल था कि जब पर्दे पर गोलीबारी और हिंसक एक्शन चल रहा हो, तो ऐसे गीत का इस्तेमाल किस तरह उसके अर्थ के साथ न्याय करता है।
इसी तरह उन्होंने 'चौहान' के टीजर में 'जुम्मा चुम्मा' गाने के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि संगीत को सिर्फ बैकग्राउंड शोर की तरह नहीं, बल्कि कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाकर इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
समीर अंजान ने बॉलीवुड में पुराने और नए कलाकारों के बीच संतुलन की कमी पर भी बात की। उन्होंने कहा कि सिर्फ नए लोगों के साथ काम करने से यह साबित नहीं होता कि संगीत बेहतर हो रहा है। उनके मुताबिक अनुभवी संगीतकारों और गीतकारों को नई पीढ़ी के साथ मौका दिया जाए तो दोनों का अनुभव मिलकर बेहतर संगीत तैयार कर सकता है।
उन्होंने अपने काम का उदाहरण देते हुए बताया कि साल 2011 की फिल्म 'फालतू' में उन्होंने सचिन-जिगर के साथ काम किया था और 'आल्टू जलालटू' तथा 'चार बज गए लेकिन पार्टी अभी बाकी है' जैसे गाने लिखे। उनका कहना है कि उम्र कभी प्रतिभा खत्म होने का प्रमाण नहीं होती।
समीर अंजान बॉलीवुड के चर्चित गीतकारों में शामिल हैं और करीब पांच दशकों से हिंदी सिनेमा के लिए गीत लिखते आ रहे हैं। उनका असली नाम समीर पुरोहित है और वह मशहूर गीतकार अंजान के बेटे हैं। 'आशिकी', 'दिल', 'राजा हिंदुस्तानी', 'कुछ कुछ होता है', 'धड़कन', 'कभी खुशी कभी गम' जैसी कई फिल्मों के लोकप्रिय गीतों से उनका नाम जुड़ा रहा है। उनके खाते में हजारों फिल्मी गीत हैं। लंबे करियर के बावजूद समीर ने बदलते दौर के साथ खुद को जोड़े रखा और नई पीढ़ी के संगीतकारों के साथ भी काम किया।
समीर ने आदित्य चोपड़ा, करण जौहर और साजिद नाडियाडवाला जैसे बड़े निर्माताओं को लेकर भी निराशा जाहिर की। उनका कहना है कि पहले इन बैनरों में अच्छे संगीत को लेकर गंभीरता दिखाई देती थी, लेकिन अब वह रवैया कम नजर आता है। समीर की पूरी नाराजगी का केंद्र यही है कि अगर अच्छे संगीत को कहानी और भावनाओं से जोड़कर इस्तेमाल नहीं किया गया तो आने वाले समय में मौलिक फिल्मी संगीत के लिए जगह और कम हो सकती है।