बॉलीवुड

Sunny Deol Birthday: इन दस डायलॉग्स से सनी देओल ने मचा दी थी खलबली

Sunny Deol ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1983 में रोमांटिक फिल्म 'बेताब' से की थी। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर के अवार्ड के लिए नॉमिनेट किया गया था।

2 min read
Sunny Deol Famous Dialogues

नई दिल्ली: बॉलीवुड के सुपरहिट एक्टर सनी देओल ने अपनी पहचान एक एक्शन हीरो के रूप में मनाई है। आज उनका 63वां जन्मदिन है। ऐसे में हर कोई उन्हें जन्मदिन की बधाई दे रहा है। सनी का जन्म 19 अक्टूबर 1956 पंजाब के साहनेवाल में हुआ था। उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1983 में रोमांटिक फिल्म 'बेताब' से की थी। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर के अवार्ड के लिए नॉमिनेट किया गया था। अपने करियर में सनी देओल ने कई सुपरहिट फिल्में दी हैं। जिसमें उनके डायलॉग्स के लिए उन्हें काफी पॉपुलैरिटी मिली। ऐसे में उनके दस सुपरहिट डायलॉग्स के बारे में आपको बताते हैं-

फिल्म- घातक (1996)
1. हलक़ में हाथ डालकर कलेजा खींच लूंगा हरामख़ोर.. उठा उठा के पटकूंगा! उठा उठा के पटकूंगा! चीर दूंगा, फाड़ दूंगा साले!

फिल्म- गदर: एक प्रेम कथा (2001)
2. अशरफ अली! आपका पाकिस्तान ज़िंदाबाद है, इससे हमें कोई ऐतराज़ नहीं लेकिन हमारा हिंदुस्तान ज़िंदाबाद है, ज़िंदाबाद था और ज़िंदाबाद रहेगा! बस बहुत हो गया।

फिल्म- घातक (1996)
3. ये मज़दूर का हाथ है कात्या, लोहा पिघलाकर उसका आकार बदल देता है! ये ताकत ख़ून-पसीने से कमाई हुई रोटी की है। मुझे किसी के टुकड़ों पर पलने की जरूरत नहीं।

फिल्म- जीत (1996)
4. क्या चाहता है? क्या चाहता है तू? मौत चाहता है? तेरे सारे कुत्तों को मैंने मार दिया, मगर वो राजू को कुछ नहीं कर सके, वो जिंदा है। तेरा कोई भी बारूद, कोई भी हथियार उसे मार नहीं सकता। आज के बाद तेरी हर सांस के पीछे मैं मौत बनकर खड़ा हूं।

फिल्म- जिद्दी (1997)
5. तेरा गुनाहों का काला चिट्‌ठा मेरे पास है इंस्पेक्टर। तुझे कानून की ठेकेदारी का लाइसेंस मिले छह साल हुए, और उन छह सालों में तूने अपने लॉकअप में, पांच लोगों को बेहरमी से मौत के घाट उतार दिया।

फिल्म- घातक (1996)
6. पिंजरे में आकर शेर भी कुत्ता बन जाता है कात्या। तू चाहता है मैं तेरे यहां कुत्ता बनकर रहूं। तू कहे तो काटूं, तू कहे तो भौंकू।

फिल्म- घायल (1990)
7. रिश्वतख़ोरी और मक्कारी ने तुम लोगों के जिस्म में मां के दूध के असर को ख़तम कर दिया है। खोखले हो गए हो। तुम सब के सब नामर्द हो।

फिल्म- दामिनी (1993)
8. चिल्लाओ मत, नहीं तो ये केस यहीं रफा-दफा कर दूंगा। न तारीख़ न सुनवाई, सीधा इंसाफ। वो भी ताबड़तोड़।

फिल्म- दामिनी (1993)
9. तारीख पर तारीख, तारीख पर तारीख...तारीख पर तारीख...तारीख मिलती रही है, लेकिन इंसाफ नहीं मिला। माई लॉर्ड इंसाफ नहीं मिला...मिली है तो सिर्फ यह तारीख।

फिल्म- जिद्दी (1997)
10. पत्थरों की दुनिया में देवता बनना तो बहुत आसान है, इंसान बनना बहुत मुश्किल।

Published on:
19 Oct 2020 11:31 am
Also Read
View All