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पिता के निधन के बाद तनीषा मुखर्जी ने छोड़ दिया था देश, बोलीं- 6 महीने अमेरिका भाग गई थी, वापस नहीं आना चाहती थी

Tanisha Mukherjee On Her Father Demise: अभिनेत्री तनीषा मुखर्जी ने हाल ही में एक इंटरव्यू में अपने पिता के निधन को लेकर बात की है। उन्होंने बताया कि उनके लिए उस दुख को सहना कितना मुश्किल था। तनीषा ने क्या कुछ कहा है, चलिए जानते हैं।
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Updated: 24 Oct 2026, 6:09 PM IST
Tanisha Mukherjee On Her Father Demise
तनीषा मुखर्जी (फोटो सोर्स- IMDb)

Tanisha Mukherjee On Her Father Demise: अभिनेत्री तनीषा मुखर्जी ने अपने जीवन के बेहद मुश्किल दौर को याद करते हुए पिता के निधन के बाद की अपनी भावनात्मक स्थिति के बारे में खुलकर बात की है। अनफोल्डिंग्स ह्यूमन्स के साथ बातचीत में तनीषा ने बताया कि पिता को खोना उनके लिए जिंदगी बदल देने वाला अनुभव था। इस सदमे से निपटने के लिए उन्होंने खुद को परिवार और देश से दूर कर लिया था। तनीषा ने बताया कि वह करीब छह महीने के लिए अमेरिका चली गई थीं और भारत लौटना ही नहीं चाहती थीं।

पिता को खोना था जिंदगी का बड़ा मोड़

तनीषा ने बातचीत के दौरान कहा कि अपने पिता को खोना उनके लिए बहुत बड़ा और जीवन को बदल देने वाला अनुभव था। उन्होंने बताया कि उस समय उनके भीतर काफी ट्रॉमा था और वह अपनी भावनाओं को अलग-अलग तरीकों से व्यक्त कर रही थीं।

अभिनेत्री के मुताबिक, उस दौर में उन्होंने सबसे पहले खुद को स्थिति से दूर करने की कोशिश की। वह अमेरिका चली गईं और करीब छह महीने तक भारत वापस नहीं आईं। तनीषा ने बताया कि उनकी मां और बहन उनसे लगातार पूछती थीं कि वह कब वापस आएंगी और आखिर क्या कर रही हैं।

लेकिन उस समय तनीषा की स्थिति ऐसी थी कि वह भारत लौटना ही नहीं चाहती थीं। उन्होंने बताया कि वह अपनी मां और बहन से कहती थीं कि वह वापस नहीं आ रही हैं। यह उनके लिए दुख और सदमे से बचने का एक तरीका बन गया था।

'बहुत भाग रही थी'

तनीषा ने अपने उस दौर को याद करते हुए कहा कि वह लगातार भाग रही थीं। वह परिस्थितियों का सामना करने के बजाय उनसे दूर जाने की कोशिश कर रही थीं। अमेरिका जाना भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा था।

हालांकि, समय के साथ उन्हें अपने दर्द का सामना करना पड़ा। तनीषा ने बताया कि बाद में वह अपने पिता के घर में रहने लगीं। उनके लिए यह भी अपने पिता की यादों और उनके जाने की सच्चाई को स्वीकार करने की प्रक्रिया का हिस्सा था।

अभिनेत्री ने माना कि पिता को खोने के बाद उन्होंने जिस तरह प्रतिक्रिया दी, उसमें काफी भावनात्मक उथल-पुथल थी। लेकिन उनके मुताबिक, इंसान कई बार मुश्किल परिस्थितियों में खुद को संभालने के लिए ऐसे तरीके अपनाता है, जिन्हें बाद में पीछे मुड़कर देखने पर वह अलग नजरिए से समझ पाता है।

ओशो की बात से मिली समझ

इस अनुभव को समझाते हुए तनीषा ने ओशो की एक बात का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्हें ओशो की एक लाइन काफी पसंद है, जिसे वह अक्सर उद्धृत करती हैं।

तनीषा ने बताया कि ओशो की बात का अर्थ है कि जब इंसान सो रहा होता है और सपने में कुछ करता है, तो जागने के बाद वह अपने सपनों के लिए खुद को दोषी नहीं ठहराता। उसी तरह जब इंसान किसी अवस्था में पूरी तरह सचेत नहीं होता, तब किए गए कामों के लिए खुद को लगातार दोषी ठहराते रहना भी सही नहीं है।

उनके मुताबिक, जब इंसान की चेतना जागती है और उसे अपनी परिस्थितियों तथा अपने व्यवहार की समझ आने लगती है, तभी वह अपने फैसलों की जिम्मेदारी लेना शुरू कर सकता है।

'खुद को दोष मत दीजिए'

तनीषा की इस बात का सार यही था कि मुश्किल दौर में इंसान को खुद के प्रति भी संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को हर समय अपने पुराने फैसलों के लिए खुद को कोसते नहीं रहना चाहिए।

पिता के निधन के बाद उनका अमेरिका चले जाना और लंबे समय तक भारत नहीं लौटना उनके लिए उस समय भावनाओं से निपटने का तरीका था। बाद में उन्होंने अपने अनुभव को समझने और स्वीकार करने की कोशिश की।

तनीषा की यह कहानी बताती है कि किसी करीबी को खोने के बाद हर व्यक्ति का दुख से निपटने का तरीका अलग हो सकता है। कोई परिवार के बीच रहकर खुद को संभालता है, तो कोई कुछ समय के लिए खुद को दुनिया से दूर कर लेता है।

Updated on:
24 Oct 2026, 6:09 PM IST
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