
The Paradise Nani: नानी की फिल्म ‘द पैराडाइज’ अपनी कहानी और दुनिया के साथ-साथ एक खास देवी की मौजूदगी को लेकर भी चर्चा में है। फिल्म में धूमावती को सावारिस समुदाय की कुल देवी के रूप में दिखाया गया है। निर्देशक श्रीकांत ओडेला ने देवी से जुड़े प्रतीकों को फिल्म की कहानी और दृश्यात्मक दुनिया का हिस्सा बनाया है। कौए, बारिश, धुआं और कीचड़ जैसे तत्व फिल्म में बार-बार दिखाई देते हैं और इन्हें सावारिस समुदाय के संघर्ष, उत्पीड़न और विद्रोह से जोड़ा गया है।
धूमावती को दस महाविद्याओं में सातवीं महाविद्या माना जाता है। उनका संबंध शाक्त और तांत्रिक परंपराओं से बताया जाता है। ‘धूमावती’ नाम संस्कृत के ‘धूम’ शब्द से जुड़ा है, जिसका अर्थ धुआं होता है।
धूमावती से जुड़ी अलग-अलग पौराणिक कथाएं मिलती हैं। एक कथा के अनुसार सती के आत्मदाह के बाद उठे धुएं से उनका प्रकट होना बताया जाता है। दूसरी कथा में सती द्वारा शिव को निगलने और बाद में विधवा रूप में शापित होने की कहानी मिलती है। अलग-अलग मान्यताओं के बावजूद धूमावती का स्वरूप आम देवी-छवियों से काफी अलग माना जाता है। उन्हें अभाव, भूख, अकेलेपन, विनाश और जीवन के कठिन पक्षों से जोड़ा जाता है। उनका वाहन कौआ माना जाता है।
‘द पैराडाइज’ में सावारिस समुदाय समाज के हाशिए पर रहने वाला समूह है। फिल्म में उनका जीवन गरीबी, गंदगी, भेदभाव और सामाजिक पहचान के अभाव से घिरा हुआ दिखाया गया है। इसी पृष्ठभूमि में धूमावती को उनकी कुल देवी बनाया गया है।
निर्देशक श्रीकांत ओडेला के अनुसार, फिल्म की दुनिया में सावारिस मानते हैं कि कौए उन्हें उस जगह तक लेकर आए, जिसे उन्होंने ‘पैराडाइज’ यानी अपना घर माना। उनके लिए यह केवल एक जगह नहीं बल्कि देवी की ओर से मिला संकेत है। यही वजह है कि वे उस जगह को छोड़ना नहीं चाहते।
फिल्म में कौओं के अलावा बारिश, धुआं और कीचड़ भी महत्वपूर्ण प्रतीक हैं। बारिश को धूमावती की मौजूदगी से जोड़ा गया है, जबकि धुआं और धूल विनाश तथा उजाड़पन की ओर संकेत करते हैं। कीचड़ में रहने वाला समुदाय और लगातार बदलता मौसम उसकी जिंदगी की मुश्किलों को दर्शाता है।
हालांकि फिल्म में इन प्रतीकों को लेकर काफी विचार दिखाई देता है, लेकिन इसकी पूरी कड़ी दर्शकों के सामने उतनी स्पष्टता से नहीं खुलती। निर्देशक की बाद की व्याख्या से धूमावती और सावारिस समुदाय के बीच संबंध ज्यादा समझ में आता है।
फिल्म की सबसे दिलचस्प बात यही है कि उसने किसी परिचित देवी के बजाय धूमावती को चुना। भूख, अकेलेपन, उपेक्षा और सामाजिक हाशिए से जुड़ा उनका स्वरूप सावारिस समुदाय की कहानी के साथ मेल खाता है। हालांकि इस विचार को फिल्म में और स्पष्ट तरीके से सामने रखा जाता, तो यह कहानी का और प्रभावशाली हिस्सा बन सकता था।