विद्या बालन की शॉर्ट फिल्म नटखट का वर्ल्ड प्रीमियर हो चुका है (Natkhat World Premiere) घरेलू हिंसा, भेदभाव जैसे मुद्दों को दिखाती है फिल्म (Natkhat on Domestic Voilence, Patriarchy) विद्या बालन ने बताया कि घरेलू हिंसा समाज के हर तबके की सच्चाई है (Vidya Balan on Domestic Voilence)
नई दिल्ली | बॉलीवुड एक्ट्रेस विद्या बालन ने पहली बार प्रोडक्शन (Producer Vidya Balan) में कदम रखा है। प्रोड्यूसर के तौर पर उनकी पहली शॉर्ट फिल्म नटखट (Film Natkhat) से ही वो तारीफ की पात्र बन गई हैं। नटखट शॉर्ट फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर We Are One: Global Film Festival (Natkhat World Premiere) पर हो चुका है। यूट्यूब पर इस फिल्म को दिखाया गया और विद्या ने कमाल के अभिनय से दिल जीत लिया। शान व्यास (Shaan Vyas) के डायरेक्शन में बनी ये शॉर्ट फिल्म समाज के उस सच से पर्दा उठाती है जो सालों से लगभग हर तबके में फैला हुआ है। घरेलू हिंसा, भेदभाव, पुरुषसत्ता का अहम, छेड़छाड़, बलात्कार जैसे कई मुद्दों को फिल्म (Natkhat on Domestic Voilence, Patriarchy) के जरिए उजागर किया है। विद्या एक हाउस वाइफ बनी हैं जो खुद भी समाज की कई कुरीतियां झेल रही होती हैं और उनका 6 साल का बेटा सोनू (Sanika Patel as Sonu) जो घर में हो रही कई बातों को सीख रहा होता है। विद्या को जब अपने बेटे में पति, दादा और चाचा की वही सोच दिखाई देती है तो वो डर जाती है और उसे एक कहानी सुनाती है।
ये कहानी खुद विद्या और उसके परिवार की है जिसे 33 मिनट की शॉर्ट फिल्म में मैसेज के तौर पर दिखाया गया है। सोनू का किरदार निभाने वाली सानिका पटेल का भी कमाल का काम किया है। विद्या बालन ने हाल ही में अपनी फिल्म के बारे में बात करते हुए बताया कि समाज के हर तबके में घरेलू हिंसा (Vidya Balan on Domestic Voilence) होती है। हमारी कहानी भले ही एक गांव की है लेकिन ये सोसाइटी में हर तरफ फैला हुआ है। जब मुझे पहली बार स्क्रिप्ट मिली तो मैं तैयार थी उस तरह का किरदार निभाने के लिए जो मैंने कभी किया नहीं था। मेरे द्वारा निभाई जाने वाली ज्यादातर महिलाएं बहुत ही तेज़, बोल्ड और मजबूत रही हैं। बहुत कम बार आपने मुझे इतना विनम्र देखा होगा।
मुझे पता था कि ये मेरी सच्चाई नहीं है। मेरे सामने अगर कोई उंगली भी उठा दे तो मैं उसका बुरा हाल कर दूं। लेकिन मैं दूसरा पहलू जानना चाहती थी। बहुत सारी महिलाएं खुद के लिए खड़ी नहीं हो पाती लेकिन जब उनके बच्चों की बात आती है तो वो उनके लिए सही करना चाहती हैं। मेरा एक पसंदीदा सीन (Vidya Balan Favourite Scene) है जहां खाने की टेबल पर घर के सभी मर्दों के बीच बातचीत चल रही है और मैं एक भी शब्द नहीं बोल सकती बल्कि मेरा चेहरा घूंघट से ढका हुआ है।
प्रोड्यूसर बने रहने की बात पर विद्या ने कहा कि मैं पहले एक्टर हूं और वैसा ही सोचती हूं। मैं प्रोड्यूसर की तरह सोचती। एक प्रोड्यूसर बनना बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है। मेरी टीम ने सबकुछ संभाला है और ये कहने में मुझे कोई शर्म नहीं है।