तब्लीगी इज्तिमा (Tablighi Ijtima )के दूसरे दिन उलेमा ने तकरीरकर लोगों को दी इस्लाम धर्म (ISlam) की शिक्षा
बुलन्दशहर. आलमी तब्लीगी इज्त़िमा में दुनियाभर से अब तक लाखों अकीदतमंद शामिल होने के लिए बुलंदशहर के दरियापुर पहुंच चुके हैं। इस तब्लीगी इज्तिमा का आज यानी रविवार दूसरा दिन है। अब भी लाखों अकिदतमन्दों के बुलंदशहर आने का सिलसिला जारी है। इस प्रोग्राम को देखते हुए स्थानीय प्रशासन पूरी तरह व्यवस्था बनाए रखने पर फोकस किए हुए हैं। हालांकि, जिले में जाम की स्थिति बनी हुई है। हमारी टीम ने ग्राउंड ज़ीरो पर पहुंचकर ये जानने और समझने की कोशिश की, आखिर इस तब्लीगी इज़्तिमा का मक़सद क्या होता है।
ये तस्वीरें हैं। यूपी के बुलन्दशहर देहात के दरियापुर में हो रहे आलमी तब्लीगी इज़्तिमा का। आज यानी रविवार इज्तिमा का दूसरा दिन है। आज भी यहां अकीदतमंदों की जमातें दूर दराज से बुलंदशहर यानी इज़्तिमा स्थल पर पहुंच रही हैं। वहीं, यहां मेजवानी कर रही इज़्तिमा कमेटी की तरफ से भी अपने मुल्क और दुसरे देशों से आने वाली जमातों और महमानों के इस्तकबाल में कोई कोर कसर बाक़ी न रहे उसके लिए तमाम व्यवस्थाएं की गई हैं। इसके अलावा ज़िला प्रशासन के साथ हज़ारों मुस्लिम नौजवान भी यातायात नियमों को ध्यान में रखते हुए, सड़कों पर उतरे हुए हैं। अब तक की बात की जाए तो लाखों अकीदतमंद इज़्तिमा में शामिल होने के लिए बुलंदशहर पहुंच चुके हैं। इसी बीच जब हमारी टीम ग्राउंड ज़ीरो पर पहुंची तो हमने मुस्लिम समुदाय के लोगों से मिलकर समझा कि आखिर आलमी तब्लीगी इज़्तिमा का क्या मक़सद होता है और इसमें हिस्सा लेने के लिए इतनी तादाद में लोग क्यों पहुंचते हैं।
इस सिलसिले में गोरखपुर से बुलंदशहर पहुंची जमात से भी बातचीत की। इस दौरान कई नौजवान ठीक तरीक़े से इज़्तिमा की परिभाषा नहीं बता सके, लेकिन उन्हें साथ लेकर बुलंदशहर पहुंचने वाले बुज़ुर्गों ने बताया कि आखिरी उनकी नज़र में इज़्तिमा का क्या महत्व है। वो इसमें क्यों हिस्सा लेते हैं। गौरतलब है कि इस तब्लीगी इज़्तिमा की तैयारियां पिछले तीन माह से चल रही थी। हज़ारों लोग पुरजोश तरीके से इसकी तैयारियों में जुटे थे। इस इज़्तिमा में शरीक होने वालीं जमातों ने बताया कि वे यहां आकर खुद को खुशनसीब मान रहे हैं।
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इस आयोजन को देखते हुए प्रशासन ने लगातार अपनी निगाहें बना रकी हैं। इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह है कि इस तीन दिवसीय तब्लीगी इज्तिमा में समाज के उन सभी लोगों को जिम्मेदारी दी गई है, जो कुछ भी किसी भी तरह का योगदान देना चाहते थे। अडोली और दरियापुर गांव के पीछे पंडाल बनाया गया है, जिसमें स्टेज पर आलिम-ए-दीन तशरीफ रखते हैं और लोगों को अपने धर्म संबंधी विचारों से अवगत करा रहे हैं।
प्रशासन और वॉलंटियर्स की टीम चप्पे-चप्पे पर तैनात हैं। इन वॉलंटियर्स में हर उम्र के लोग शामिल हैं। सभी आने वाले मेहमानों को सहूलियत से उपयुक्त स्थान तक पहुंचाने को प्रयासरत दिखते हैं। आने वालों के लिए भोजन से लेकर पानी और तमाम बुनियादी जरूरतों के पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। यहां वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। मुस्लिम धर्म के अनुयायियों में जोश और उत्साह देखा जा रहा है। सबसे जो अच्छी बात है वो यह कि इज्तिमा के आयोजनकर्ताओं का बेहतर तालमेल देखने को मिल रहा है। यही वजह है कि अकीदतमंदों को कोई दिक्कत नहीं आ रही है। सभी का सिर्फ एक ही मकसद है कि वे यहां जल्द से जल्द पहुंचें। आयोजनकर्ताओं की टीम वर्क भी काबिलेतारीफ है।