बुलंदशहर में आर्थिक तंगी से परेशान शुगर मिल कर्मचारी ने सुसाइड नोट लिखकर जान दे दी। घर में आटा न होने और बेटियों का ख्याल रखने की गुहार ने सबको झकझोर दिया। गुस्साए ग्रामीणों ने सड़क जाम कर मिल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए है।
बुलंदशहर जिले में आर्थिक तंगी से जूझ रहे एक शुगर मिल कर्मचारी ने फंदा लगाकर जान दे दी। सुसाइड नोट में उसने घर में आटा तक न होने की बात लिखी। घटना के बाद परिवार और ग्रामीणों में गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने शव रखकर सड़क जाम किया। मिल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए है।
बुलंदशहर के अगौता क्षेत्र की रहने वाले 50 वर्षीय मोहम्मद शरीफ पिछले करीब 20 वर्षों से अनामिका शुगर मिल में काम कर रहे थे। परिवार के मुताबिक वे काफी समय से आर्थिक दबाव में थे। बताया जा रहा है कि मिल की ओर से उन पर लगभग ढाई लाख रुपये जमा करने का दबाव बनाया जा रहा था। यह रकम किसानों को दी गई पेस्टिसाइड दवा के भुगतान से जुड़ी बताई गई है।
आत्महत्या से पहले शरीफ ने एक सुसाइड नोट लिखा। उसमें उन्होंने परिवार, भाई-बहनों और रिश्तेदारों से माफी मांगी। अपनी बेटियों का ख्याल रखने की गुजारिश की और लिखा कि वे मजबूरी में यह कदम उठा रहे हैं। उन्होंने घर में आटा तक न होने की पीड़ा भी जताई। यह शब्द पढ़कर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
घटना की खबर फैलते ही परिवार और गांव के लोग आक्रोशित हो उठे। उन्होंने शव को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। और शुगर मिल के गेट पर विरोध प्रदर्शन किया। लोगों का आरोप है कि मिल प्रबंधन के मानसिक दबाव ने शरीफ को यह कदम उठाने पर मजबूर किया। प्रदर्शनकारियों ने मृतक के बेटे को नौकरी और परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की।
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची लोगों को समझा बूझकर जाम खुलवाया। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि परिवार की शिकायत दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच की जा रही है। वहीं मिल प्रबंधन ने खुद को दोषमुक्त बताते हुए परिवार के प्रति संवेदना जताई। और हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। शरीफ की मौत ने एक बार फिर आर्थिक तंगी और नौकरी की असुरक्षा से जूझते परिवारों की चिंता को सामने ला दिया है।