जैन समाज के चल रहे दसलक्षण पर्व के पांचवे दिन सोमवार को उत्तम सत्य धर्म की संगीतमय पूजा-अर्चना हुई। यहां बघेरवाल छात्रावास में मुनि वैराग्य सागर व मुनि सुप्रभ सागर महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि आत्म शांति का नाम ही मोक्ष हैं। मीडिया प्रभारी नरोत्तम जैन ने बताया कि शाम को महाआरती की गई।
बूंदी. जैन समाज के चल रहे दसलक्षण पर्व के पांचवे दिन सोमवार को उत्तम सत्य धर्म की संगीतमय पूजा-अर्चना हुई। यहां बघेरवाल छात्रावास में मुनि वैराग्य सागर व मुनि सुप्रभ सागर महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि आत्म शांति का नाम ही मोक्ष हैं। मीडिया प्रभारी नरोत्तम जैन ने बताया कि शाम को महाआरती की गई। उसके बाद जैन म्यूजिकल हाउजी जैन संस्कार महिला मंडल द्वारा खिलाया गया। बा.ब्र.मनीष भाई, देवेन्द्र जैन एवं संगीतकार प्राची जैन ने पूजन एवं धार्मिक क्रियाएं कराई। मंगलवार को सुंगध दशमी मनाई जाएगी।
मंदिरों में धूप खेई जाएगी। जैन मुनि सभी जिनालयों के दर्शन करेंगे। दोपहर 2 बजे से शोभायात्रा शुरू होगी। चौगान जैन मंदिर में आर्यिका सत्यमति माताजी व आर्यिका हेमश्री माताजी संघ के सानिध्य में संगीतमय विधान जारी है। बाल ब्रह्मचारिणी आस्था बहन के मार्गदर्शन में जैन अतिशय ग्रुप की ओर से फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता हुई। जिसमें बच्चों ने जैन धर्म पर आधारित अलग-अलग रूप धरे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के अतिरिक्त निजी सचिव अंकित जैन थे। ग्रुप अध्यक्ष चिन्मय जैन व कोषाध्यक्ष समृद्ध जैन ने बताया कि प्रतियोगिता 3 वर्ग में हुई। प्रथम वर्ग 0 से 5 साल तक के बच्चों में प्रथम दर्श गंगवाल व द्वितीय कियान बाकलीवाल, द्वितीय वर्ग 6 से 12 वर्ष में प्रथम तन्शी गंगवाल, तृतीय वर्ग में प्रथम लांतव गंगवाल रहे।
ग्रुप से जुड़े अविनाश गंगवाल, अतुल कालीवाल, अक्षय जैन, इशू जैन, शैलेश जैन आदि व्यवस्था में जुटे रहे। संचालन एडवोकेट आदित्य जैन ने किया। संस्था ने स्वागत किया। रजतगृह कॉलोनी स्थित शीतलनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पूजा अर्चना हुई। मंदिर समिति अध्यक्ष बिरधीचंद धनोप्या ने बताया कि सुबह भगवान का अभिषेक व शांतिधारा हुई। शाम को आरती की गई। उपाध्यक्ष संजय जैन एडवोकेट, समाजसेवी कैलाशचंद पाण्ड्या,महावीर धनोप्या, तरूण सेठिया, पदम हरसौरा व कमल पाटनी ने अपने विचार व्यक्त की।
सत्य परेशान हो सकता है पराजित नही
डाबी. दशलक्षण महापर्व के पांचवे दिन सोमवार को उत्तम सत्य धर्म की पूजा की गई। प्रात:काल मंत्रोचार के साथ अभिषेक, 108 कलश से अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन किया गया। बाल ब्रह्मचारिणी नीता दीदी ने कहा कि जहां क्षमा, मार्दव, आर्जव, शौच आत्मा का स्वभाव है, वहीं सत्य संयम तप त्याग इन गुणों को प्रगट करने के उपाय हैं, या कहें कि ये वो साधन हैं जिनसे हम आत्मिक गुणों की अनुभूति और प्रकट कर सकते हैं। सत्य बोलकर सत्य धर्म अपनाकर अगले भव को सुरक्षित करना चाहिए।इस दौरान मूलचंद खटोड, धर्मचंद हरसोरा, चांदमल हरसौरा, लाभचंद धनोप्या, मोनू धानोत्या, रोहित हरसौरा, राजेन्द्र गोधा, पारस बडज़ात्या सहित अन्य मौजूद रहे।