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Bundi : बिलकेश्वर महादेव महादेव में 550 सीढिय़ों के पार मिलता शिव आस्था और प्रकृति का अद्भुत सुकून

हाड़ौती अंचल की सुरम्य पहाडिय़ों में स्थित बिलकेश्वर महादेव, जिन्हें ‘गेंद के महादेव’ उपनाम से भी जाना जाता है, आज श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
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बूंदी

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Narendra Agarwal

•

Updated: 15 Mar 2026, 11:47 AM IST

बिलकेश्वर महादेव महादेव में 550 सीढिय़ों के पार मिलता शिव आस्था और प्रकृति का अद्भुत सुकून

बूंदी. दुर्गम चढ़ाई के दौरान लिया गया विहंगम प्राकृतिक दृश्य।

बूंदी. हाड़ौती अंचल की सुरम्य पहाडिय़ों में स्थित बिलकेश्वर महादेव, जिन्हें ‘गेंद के महादेव’ उपनाम से भी जाना जाता है, आज श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पहाड़ की तलहटी से शिखर तक फैला यह पावन स्थल आस्था, रोमांच और विशुद्ध प्राकृतिक सौंदर्य का ऐसा संगम प्रस्तुत करता है, जो यहां पहुंचने वाले हर व्यक्ति के मन पर आस्था की गहरी छाप छोड़ता है। जिला मुख्यालय बूंदी से वाया खटकड़ नैनवां मार्ग से पहुंचकर आगे लगभग तीन-चार किलोमीटर कच्चे रास्ते का सफर तय करना पड़ता है। इसके बाद करीब 550 सीढिय़ों की चुनौतीपूर्ण चढ़ाई पार कर श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शनों तक पहुंचते हैं, यह कठिन लेकिन रोमांचक आरोहण ही इस यात्रा को खास बनाता है। सीढिय़ां चढ़ते हुए जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती है, वैसे-वैसे आसपास का प्राकृतिक विस्तार मन को उत्साहित करता चलता है।

तो नदी का जल कल-कल बहता है
बिलकेश्वर सेवा समिति सदस्य आशुतोष गौतम ने बताया कि मेज नदी के किनारे संगम क्षेत्र में तथा रामगढ़ टाइगर रि•ार्व के कोर एरिया की घनी वादियों के बीच स्थित यह धाम विशुद्ध प्राकृतिक परिवेश से आच्छादित है। वर्षाकाल में जब पहाड़ हरियाली से ढक जाते हैं और नदी का जल कल-कल बहता है, तब यहां का ²श्य अत्यंत मनोहारी हो उठता है। पहाड़ी शिखर से दिखाई देने वाला विहंगम ²श्य प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। शिखर पर विराजित भगवान बिलकेश्वर महादेव की पवित्र स्थापना क्षेत्रवासियों की अटूट आस्था का प्रतीक है। श्रद्धालु पूरे विश्वास के साथ यहां जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना यहां अवश्य फलित होती है। तलहटी पर ही ब्रह्माणी चौथ माता का मंदिर है।

नई पहचान देने की पूरी क्षमता रखता
प्राकृतिक शांति, धार्मिक आस्था और साहसिक चढ़ाई। इन तीनों का अद्भुत समन्वय बिलकेश्वर महादेव को रविवार आउङ्क्षटग के लिए आदर्श बनाता है। पक्षियों की मधुर चहचहाहट, पर्वतीय हवाओं की शीतलता और नीचे बहती मेज नदी का सौम्य प्रवाह यहां आने वालों को मानसिक सुकून और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करता है। धार्मिक पर्यटन को नई पहचान देने की पूरी क्षमता रखता है।

इतिहास एक नजर में
शिक्षक रामलक्ष्मण मीणा बताते है कि मंदिर की स्थापना महाभारत काल में मानी जाती है। महाभारत के खिलभाग हरिवंश पुराण में पेज नं. 650 पर महादेव की स्थापना व महिमा के बारे में विस्तृत वर्णन मिलता है।