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Bundi : घर की रसोई में युद्ध का असर, ढाबों पर सुलगी सिगड़ी और भट्टियां

युद्ध के कारण एलपीजी आपूर्ति ठप होने या महंगी होने से रसोई में लकड़ी के चूल्हे और कोयले की वापसी हो गई है।

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बूंदी

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pankaj joshi

Mar 14, 2026

Bundi : घर की रसोई में युद्ध का असर, ढाबों पर सुलगी सिगड़ी और भट्टियां

बूंदी. एक गैस एजेंसी पर लगी लोगों की भीड़।

बूंदी. युद्ध के कारण एलपीजी आपूर्ति ठप होने या महंगी होने से रसोई में लकड़ी के चूल्हे और कोयले की वापसी हो गई है। हालांकि युद्ध का सबसे अधिक असर घर की रसोई पर देखने को मिल रहा है। यहां बुकिंग के बाद भी लोगों को सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की भीड़ जमा होने लगी है। वहीं रेस्टोरेंट और ढ़ाबों वालों ने सिलेंडर की कमी को देखते हुए लकड़ी की चूल्हे वाली भट्टी का उपयोग करना शुरू कर दिया है।

हालांकि इधर, एजेंसी मालिक और कर्मचारी भी उपभोक्ताओं को समझाने और घरेलू गैस की पूर्ति के प्रयास में लगे है। युद्ध के चलते गैस बुकिंग का समय बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है। गैस एजेंसियों पर लोगों की भीड़ बढ़ गई है और लोग एडवांस में सिलेंडर भरवा रहे है। वहीं रसद विभाग का कहना है कि गैस की कमी नहीं है, लेकिन लोगों में अफवाह फैल गई है कि गैस की सप्लाई प्रभावित होगी। हालांकि कंपनियों की ओर से नियमित गैस सप्लाई की जा रही है।

600 रुपए क्विंटल आ रही लकड़ी
एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति में बाधा के कारण लोग पुराने पारंपरिक तरीकों को अपनाने पर मजबूर हो गए हैं। व्यवसायी और ग्रामीण इलाकों में दुकानदारों ने गैस की अनुपलब्धता के बीच खाना पकाने के लिए फिर से मिट्टी या ईंटों की चूल्हे की भट्टी (उपन) बना ली है। एक ढ़ाबा संचालक ने बताया कि फिलहाल अभी तो एक चूल्हे वाली लकड़ी 4 हजार रुपए में बनी और लकड़ी की कीमत 600 रुपए क्विंटल आ रही है। अगर आगे भी कमर्शियल गैस की कमी रही हो इनकी मांग बढऩा लाजमी है।

लोगों में भय व्याप्त, नहीं मिल रहा सिलेंडर
एक गैस संचालक ने बताया की 7 मार्च से गैस रिफिल पर 60 रुपए बढऩे के बाद से ही बुकिंग 27 दिन करने के कारण लोगों में भय व्याप्त हो गया है। शहर के देवपुरा निवासी पलाश ने बताया कि 5 मार्च को गैस सिलेंडर बुक किया था, लेकिन 11 मार्च होने के बावजूद भी अब तक डिलीवरी नहीं हो पाई। गैस एजेंसी पर आया हूं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। कई लोगों का कहना है कि उनके 15 दिन में सिलेंडर खत्म हो रहा है, जिसके चलते लोगों को काफी परेशानी हो रही है। पहले जहां प्रतिदिन 700 से 750 सिलेंडर आपूर्ति होती थी, लेकिन संकट के चलते इसमें कमी आ गई है। अब 600 के आसपास सिलेंडर प्रतिदिन सप्लाई की जा रही है।

इनका कहना
घरेलू सिलेंडरों की कोई परेशानी नहीं है. अब 25 दिन की अवधि के बाद ही बुकिंग हो सकेगी, जिसके बाद ही डिलीवरी होगी। कमर्शियल सिलेंडरों को लेकर जरूर समस्या खड़ी हो रही है।
वर्धन विजय, एजेंसी संचालक, बूंदी