लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि अगर हम चाहते है कि समाज की दिशा बदले, तो सबसे पहले हमें अपनी सोच और कार्यशैली की लकीर को बड़ा करना होगा।
बूंदी. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि अगर हम चाहते है कि समाज की दिशा बदले, तो सबसे पहले हमें अपनी सोच और कार्यशैली की लकीर को बड़ा करना होगा। उन्होंने कहा कि सामाजिक सेवा का वास्तविक उद्देश्य केवल उपस्थिति भर दर्ज कराना नहीं, बल्कि व्यक्ति के जीवन में सार्थक बदलाव लाना
होना चाहिए।
बिरला रविवार को बूंदी व लाखेरी में आयोजित आधार शक्ति संगम कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्धजनों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमें स्वयं को निरंतर आत्म मंथन की प्रक्रिया में रखते हुए अपने ²ष्टिकोण और नेतृत्व को परिष्कृत करते रहना चाहिए। बिरला ने कहा कि एक संवेदनशील समाज की बुनियाद सीधे संवाद पर टिकी होती है। हमें क्षेत्र के प्रत्येक व्यक्ति की समस्याओं और अपेक्षाओं को सुनना होगा और उनका समाधान एक जिम्मेदार प्रतिनिधि की तरह प्रस्तुत करना होगा। उन्होंने कहा कि सच्चा समाजसेवी वही है जो जन-जीवन के सुख-दुख में सहभागी हो और नेतृत्व ऐसा जो संघर्ष से निखरकर,स्वाभिमान से भरा हो।
छोटे सोच वाले लोग कभी बड़ी भूमिका नहीं निभा सकते। पूर्व मंत्री बाबूलाल वर्मा, पूर्व विधायक अशोक डोगरा, चंद्रकांता मेघवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष रामेश्वर मीणा ने भी संबोधित किया। पूर्व जिलाध्यक्ष
सुरेश अग्रवाल, कालूलाल जांगीड़, भंवरलाल शर्मा, सभापति सरोज अग्रवाल, प्रधान राजेश रायपुरिया, कुंजबिहारी बिल्या, मोजी नुवाल आदि मौजूद रहे।
चौपाल से निकले विकास की दिशा
बिरला ने कहा कि विकास योजनाएं ऊपर से नहीं, जड़ों से उपजनी चाहिए। गांवों में संवाद की संस्कृति को पुनर्जीवित करते हुए चौपालों के माध्यम से स्थानीय समस्याओं की सूची बनाई जानी चाहिए, ताकि विकास की प्राथमिकताएं •ामीन से तय हों और क्रियान्वयन में
पारदर्शिता आए।