बूंदी

ईको-फ्रेंडली बनेंगे आंगनबाड़ी केंद्र, प्ले स्कूल जैसा दिखेगा नजारा

प्रदेश के 340 ब्लॉकों में आंगनबाड़ी केंद्रों को अब ईको-फ्रेंडली और आदर्श रूप में विकसित किया जा रहा है।

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Apr 28, 2025
आंगनबाड़ी केंद्र

बूंदी. प्रदेश के 340 ब्लॉकों में आंगनबाड़ी केंद्रों को अब ईको-फ्रेंडली और आदर्श रूप में विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों में बच्चों को निजी प्ले स्कूल जैसा माहौल मिलेगा। राज्य सरकार की मंशा है कि ग्रामीण स्तर पर बच्चों को शाला-पूर्व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर पोषण सुविधा मिल सके।

प्रथम चरण में प्रत्येक ब्लॉक में एक-एक केंद्र तैयार
हर ब्लॉक में एक-एक आंगनबाड़ी केंद्र को आधुनिक और आदर्श रूप में विकसित कर लिया गया है। अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो जल्द ही प्रदेश के 60 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को इसी तर्ज पर विकसित किया जाएगा। पहले से चयनित भवनों में सेवाओं को सशक्त बनाने का काम किया जा चुका है।

क्या-क्या होंगी सुविधाएं
इन आदर्श आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को आकर्षक और प्ले स्कूल जैसा माहौल देने के लिए कई नई सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं।
●रंग-बिरंगी बिल्डिंग व वॉल पेंटिंग
● चाइल्ड फ्रेंडली फर्नीचर
●खेल मैदान व फिसल पट्टी
●खिलौने व खेलकूद का सामान
●आकर्षक कहानियों और कार्टून चित्रकारी वाली दीवारें
●टॉय किट
●आधुनिक शौचालय
●कुर्सी-टेबल व आरओ
●पोषाहार कंटेनर
●पानी की टंकी के लिए पंप
●पोषण वाटिका

प्रत्येक ब्लॉक में पांच-पांच केंद्र बनेंगे
सरकार की योजना है कि हर ब्लॉक में पांच-पांच आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र विकसित किए जाएं। प्रथम चरण में एक-एक केंद्र का आधुनिकीकरण कर लिया गया है। प्रत्येक केंद्र पर लगभग 70,000 का खर्च आया है। बच्चों ने यहां खेल-खेल में पढ़ाई में भी रूचि दिखानी शुरू कर दी है। क्यों उठाया गया ये कदम
पिछले कुछ समय से आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की संया में गिरावट देखी गई थी। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों को प्ले स्कूल की तर्ज पर विकसित करने का निर्णय लिया। इससे न केवल बच्चों का बल्कि अभिभावकों का भी इन केंद्रों के प्रति जुड़ाव बढ़ेगा।

इनका कहना है
ग्रामीण स्तर पर बच्चों को शाला-पूर्व अच्छी शिक्षा और बेहतर पोषण सुविधा देने की मंशा के अनुरूप हर ब्लॉक में पांच-पांच आदर्श आंगनबाड़ी केंद्र विकसित करने की योजना है। पहले चरण में हर ब्लॉक में एक-एक केंद्र का आधुनिकीकरण कर लिया गया है।
ऋचा चतुर्वेदी, उप निदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग, बूंदी

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