कस्बों सहित क्षेत्रीय गांवों में लंबे समय से चल रही अतिवृष्टि से किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया है।
भण्डेड़ा. कस्बों सहित क्षेत्रीय गांवों में लंबे समय से चल रही अतिवृष्टि से किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया है। किसानों की खरीफ फसल उड़द, मूंग, ज्वार, बाजरा, मक्का सहित सब्जियां पूरी तरह से गलन की चपेट में आ चुकी है। खेतों में खराब फसलें अब धूप निकलने के साथ ही दुर्गंध देने लगी है। किसानों के सामने अब विकट समस्या आ गई है। पशुओं के लिए चारा तक नहीं बच पाया है। क्षेत्र में प्रकृति की मार ने खेतों में सब चौपट कर दिया है। पशुपालक कम पैसों में अपने मवेशियों को बेचने को मजबूर हो रहे हैं।
जानकारी अनुसार क्षेत्र में खरीफ के इस सीजन में तीन माह से हो रही बारिश से किसानों के खेतों में लंबे समय से बरसाती पानी भरा रहने से ताल-तलैया का रूप ले रखा है। बारिश का पानी व अन्य नालो व दूर तक के नाले में आए उफान से खेत तरबतर हो चुके थे। अब दो दिन से निकल रही धूप से खेतों में फसलें गलने से इस समय बदबू आने लगी है। क्षेत्रीय किसानों का कहना है कि इस सीजन की फसलें बर्बाद हुई, वह देख ली। पर अब पशुओं के लिए खिलाने व पेट भरने के लिए चारा तक नहीं बचा है।
इस समय जो नजर आ रहा है, उसे देखते हुए पशुपालक पशुओं को ओने-पौने दामों में बेचने को मजबूर हो रहे है। मंहगें दामों में खाद-बीज खरीदकर खरीफ फसल की अच्छी उपज मिलने को लेकर फसल की बुवाई की नियत समय पर की थी, लेकिन क्षेत्र में फसलें की बुवाई हुई, तब से ही क्षेत्र में बारिश का कहर बरपा गया, जो कुछ फसले तो पहले ही बर्बाद हो गई कुछ फसलें बची थी, जो वह भी इस सप्ताह में हुई बारिश ने बर्बाद कर दी।
वर्तमान में पशुओं के लिए काटकर मक्का की फसल को डालते है, तो उसमें उठ रही दुर्गंध से उसे भी नहीं खाते है। संबंधित विभाग किसानों व पशुपालकों की समस्या को गंभीरता से जाने तो सभी को राहत मिल सके। पिछले सत्र भी अतिवृष्टि की वजह से खरीफ फसल हाथ नहीं आई थी, अबकी बार भी इस सीजन की फसल गल चुकी है। अब क्षेत्रीय किसानों पर पारिवारिक सदस्यों की आवश्यकता की पूर्ति कैसे हो पाएगी। यह चिंता सताने लगी है।