- एससी, एसटी एक्ट में संशोधन के विरोध में हुए एकजुट-राष्ट्रपति के नाम जिला कलक्टर को सौंपा ज्ञापन- बूंदी शहर सहित कई कस्बे रहे बंद
बंूदी. एससी, एसटी एक्ट में संशोधन के खिलाफ भारत बंद के आह्वान पर बूंदी शहर सहित कई कस्बे बंद रहे। बाजारों में लोगों की टोलियां समूह के रूप में वाहनों पर घूमती रही। युवाओं ने सरकार विरोधी नारे लगाकर विरोध जताया। बंद समर्थकों ने जहां कहीं थड़ी व ठेला खुला नजर आया उसे बंद करा दिया। जिले के कई कस्बों में बंद को लेकर तनाव बना रहा।
बूंदी शहर में अनुसूचित जाति जनजाति के सभी लोग नगर परिषद के बाहर एकत्रित हुए। जहां से वाहन रैली के रूप में मुख्य बाजारों में पहुंचे। जो दुकाने खुली मिली उन्हें बंद करा दिया।शहर के कोटा रोड, इंद्राबाजार, सदर बाजार, बालचंदपाड़ा, बायपास रोड, मंडी रोड, देवपुरा, पुलिस लाइन रोड, नैनवां रोड सहित शहरभर में घूमकर विरोध प्रदर्शन किया। युवाओं की टोलियों को देखकर शहर में किसी ने दुकानें नहीं खोली। शहर में कुछ जगहों पर थड़ी व ठेले खुले थे, जिन्हें भी प्रदर्शन कर रहे लोगों ने बंद करा दिया। वाहन रैली वापस नगर परिषद के बाहर पहुंचकर समाप्त हुई। इस दौरान कोतवाली, सदर थाना पुलिस मय जाप्ते के प्रदर्शनकारियों के साथ चल रही थी। ताकि शहर में कहीं भी अप्रिय घटना नहीं हो सके।
आमसभा में बताई पीड़ा
नगर परिषद के सामने आमसभा हुई। जिसमें डॉ.भीमराव अम्बेडकर कल्याण समिति अध्यक्ष बाबूलाल वर्मा, पूर्व जिला प्रमुख महावीर मीणा व राकेश बोयत, उपजिला प्रमुख सत्येंद्र मीणा, कन्हैयालाल मेघवाल, ओमप्रकाश तम्बोली, संजय तंबोली, मोडूलाल वर्मा, डी.के. मेघवाल, कन्हैयालाल मेघवाल आदि पदाधिकारियों ने संबोधित किया। जिसमें उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति जन जाति अत्याचार निवारण अधिनियम १९८९ की धारा ३ को कमजोर कर प्रभावित किया गया है।
जिससे दलितों पर अत्याचार बढ़ेंगे। सभी लोगों ने सामूहिक रूप से कलक्टे्रट पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा।इस दौरान प्रधान मधु वर्मा, रूपकला मीणा, पार्षद मनोज मीणा, चेतराम आलोरिया, छात्रसंघ अध्यक्ष भगवत मीणा, रामेश्वर मीणा, प्रेम शंकर बैरवा, हंसराज नायक आदि सहित कई जने मौजूद थे। इधर, एक्ट में संशोधन के विरोध में कांगे्रस अनुसूचित जन जाति विभाग जिलाध्यक्ष दीपक मीणा के नेतृत्व में भी जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान शहर अध्यक्ष मुकेश मीणा, उपाध्यक्ष देवराज मीणा आदि मौजूद थे।