साइबर ठगी और संदिग्ध लेनदेन के चलते फ्रीज या होल्ड किए गए बैंक खातों को लेकर अब खाताधारकों को बड़ी राहत मिलेगी। अब ऐसे खातों को खोलने की प्रक्रिया सीधे संबंधित बैंक की होम ब्रांच से ही पूरी की जा सकेगी। इससे लोगों को बार-बार पुलिस और साइबर थाने के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
बूंदी. साइबर ठगी और संदिग्ध लेनदेन के चलते फ्रीज या होल्ड किए गए बैंक खातों को लेकर अब खाताधारकों को बड़ी राहत मिलेगी। अब ऐसे खातों को खोलने की प्रक्रिया सीधे संबंधित बैंक की होम ब्रांच से ही पूरी की जा सकेगी। इससे लोगों को बार-बार पुलिस और साइबर थाने के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आईफोरसी), नई दिल्ली की ओर से इस संबंध में 93 पेज की नई गाइडलाइन जारी की गई है।
वहीं आरबीआई ने भी सभी बैंकों को इसके पालन के लिए एसओपी जारी की है। नई व्यवस्था के तहत जीआरएम और एमआरएम दो मॉड्यूल लागू किए गए हैं। पुलिस अधीक्षक अवनीश कुमार शर्मा ने हाल ही में एसपी कार्यालय में बैंक प्रतिनिधियों की बैठक लेकर खाताधारकों को राहत देने के निर्देश दिए। जिले में पिछले एक वर्ष में करीब 70 हजार से अधिक खाते होल्ड या फ्रीज किए गए हैं। साइबर थाना के सहायक उप निरीक्षक मुकेंद्रपाल सिंह ने बताया कि नई व्यवस्था का उद्देश्य संदिग्ध लेनदेन के मामलों में आमजन को त्वरित राहत देना है।
फ्रीज खातों के लिए नई प्रक्रिया लागू
नई व्यवस्था के अनुसार अब प्रभावित खाताधारक अपनी होम ब्रांच में आवेदन प्रस्तुत करेंगे। बैंक अधिकारी आवेदन स्वीकार कर संबंधित लेनदेन का सत्यापन करेंगे और आगे की कार्रवाई करेंगे। इससे 1930 हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के कारण फ्रीज खातों को जल्द अनफ्रीज करने में मदद मिलेगी। बूंदी जिले में वर्ष 2025 में साइबर ठगी की 810 शिकायतें दर्ज हुई थीं, जबकि वर्ष 2026 के शुरुआती चार महीनों में ही 432 शिकायतें सामने आ चुकी हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए तेज समाधान प्रणाली लागू की गई है।
बैंक अब नहीं कर सकेंगे इनकार
पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित बैठक में बैंक प्रतिनिधियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जीआरएम के तहत प्रत्येक शिकायत अनिवार्य रूप से स्वीकार की जाए। साइबर पुलिस के अनुसार कई बैंक शाखाएं जागरूकता के अभाव में खाताधारकों के आवेदन लेने से इनकार कर देती थीं, जिससे लोगों को परेशानी उठानी पड़ती थी।
एमआरएम पोर्टल से वापस मिलेगी ठगी की राशि
ठगी के शिकार उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए एमआरएम पोर्टल भी शुरू किया गया है। इसके माध्यम से उपभोक्ता अपने मोबाइल पर ही होल्ड राशि और संबंधित खाते की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। राशि वापस पाने के लिए उपभोक्ता को आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खाते का स्टेटमेंट पोर्टल पर अपलोड करना होगा। यदि कोई उपभोक्ता स्वयं प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाता है तो संबंधित थाने के अनुसंधान अधिकारी की मदद भी ले सकेगा।
जीआरएम मॉड्यूल से तेजी से होगा समाधान
साइबर पुलिस थाना ने जिले के सभी बैंकों को ‘ग्रीवेंस रिड्रेसल मॉड्यूल’ (जीआरएम) लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत बैंक स्तर से ही साइबर शिकायतें ऑनलाइन पुलिस तक पहुंचाई जाएंगी। साइबर क्राइम कांस्टेबल सुभाष चंद्र ने बताया कि अब खाताधारकों को थाने जाने की आवश्यकता नहीं होगी। खाताधारक केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर पोर्टल पर रिक्वेस्ट दर्ज करेंगे। इसके बाद संबंधित जांच अधिकारी सात दिन के भीतर वीडियो कॉल के जरिए बैंक अधिकारियों के साथ जांच करेगा। समाधान नहीं मिलने पर खाताधारक उच्च अधिकारियों से भी शिकायत कर सकेंगे। मॉड्यूल की मॉनिटङ्क्षरग जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर
पर होगी।
साइबर ठगी और संदिग्ध लेनदेन के कारण फ्रीज या होल्ड हुए खातों के मामलों में अब खाताधारकों को सीधे होम ब्रांच स्तर पर प्राथमिक समाधान मिलेगा। इससे आमजन को बार-बार बैंक और पुलिस के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। बैंक प्रतिनिधियों की बैठक लेकर उन्हें दिशा-निर्देशों से अवगत कराया गया है।
अवनीश कुमार शर्मा, पुलिस अधीक्षक, बूंदी