नैनवां. खेत पर जिला प्रशासन की ओर से किए फसल खराबे के सर्वे व फसल बीमा कम्पनी के पोर्टल पर खराबा कम दर्शाने के मामले सामने आए है। किसानों का आरोप है कि अतिवृष्टि से खेतों में मौके पर जितना खराबा लिखा गया था। पोर्टल पर उतना खराबा नहीं बताया गया। ऐसे में किसानों को […]
नैनवां. खेत पर जिला प्रशासन की ओर से किए फसल खराबे के सर्वे व फसल बीमा कम्पनी के पोर्टल पर खराबा कम दर्शाने के मामले सामने आए है। किसानों का आरोप है कि अतिवृष्टि से खेतों में मौके पर जितना खराबा लिखा गया था। पोर्टल पर उतना खराबा नहीं बताया गया। ऐसे में किसानों को खराबे का पर्याप्त मुआवजा नहीं मिल पाएगा।
जरखोदा के किसान शंभूलाल गोस्वामी ने बताया कि उसके एक खेत में 3.7861 हेक्टेयर में सोयाबीन की फसल का मौके पर कृषि विभाग की टीम ने 67 प्रतिशत खराबा दर्ज किया था। इसी प्रकार 2.11 हेक्टेयर में उड़द की फसल में 69 प्रतिशत खराबा दर्ज किया गया था। जबकि फसल बीमा कम्पनी ने ऑनलाइन पोर्टल पर सोयाबीन फसल में 6.8 व उड़द की फसल में 5.6 प्रतिशत ही खराबा दर्शाया है।
जरखोदा के ही किसान हरिमोहन धाकड़ ने बताया कि उसके पिता के खातेदारी की 2.26 हेक्टेयर में उड़द की फसल में मौके पर 70 प्रतिशत खराबा व 1.14 हेक्टेयर सोयाबीन की फसल में 65 प्रतिशत खराबा दर्शाया था। जबकि फसल बीमा कम्पनी ने पोर्टल पर उड़द की फसल में 6.6 प्रतिशत व सोयाबीन की फसल में मात्र 4.5 प्रतिशत ही खराबा दर्शाया है।गुरजनिया गांव के किसान मायाराम मीणा ने बताया कि उसकी एक हेक्टेयर में उड़द की फसल में मौके पर 50 प्रतिशत खराबा बताया था। जबकि बीमा कम्पनी ने 9.72 प्रतिशत ही खराबा दर्शाया है।
उसके भाई प्रहलाद मीणा के एक हेक्टेयर उड़द की फसल में मौके पर 60 प्रतिशत खराबा बताया था, जबकि बीमा कम्पनी के पोर्टल पर 12 प्रतिशत खराबा दर्शाया है। गुरजनिया के ही किसान हंसराज मीणा ने बताया की उसकी एक हेक्टेयर की उड़द की फसल में मौके पर 60 प्रतिशत खराबा बताया कि जबकि कम्पनी ने पोर्टल पर 12 प्रतिशत खराबा दर्शाया है।
यह टीम बनाई थी
कृषि विभाग के अनुसार फसल खराबे के आकलन के लिए तीन सदस्यों की टीम गठित की थी। टीम में क्षेत्र का कृषि पर्यवेक्षक, फसल बीमा करने वाली टीम का प्रतिनिधि व खातेदार किसान शामिल थे। टीम को खेतों पर पहुंचकर खराबे की रिपोर्ट देनी होती है।
रेकॉर्ड मांगा है
कृषि विभाग के उपनिदेशक राजेश शर्मा का कहना है कि शनिवार को धरने पर बैठे किसानों ने सर्वे टीम द्वारा जितना खराबा बताया था। कम्पनी के पोर्टल पर खराबा कम दिखाने के मामले रखे थे। बीमा कम्पनी से किसानों के खराबे के सर्वे फार्म में दर्ज खराबे व पोर्टल दर्ज रेकॉर्ड को विभाग को प्रस्तुत करने को कहा है।
पूरे जिले में हो जांच
किसानों ने बताया कि यह तो बानगी मात्र है। जिले में हुए फसल खराबे का डाटा बीमा कम्पनी व कृषि विभाग को सार्वजनिक करना चाहिए, जिससे पता चल सके की बीमा कम्पनी ने कितने नुकसान का आकलन किया है। बीमा कम्पनी किसानों के फसल खराब होने पर भी मुआवजा राशि में कुठाराघात कर रही है।
डाटा अभी फाइनल नहीं हुए
बीमा कम्पनी के जिला प्रबंधक जितेन्द्र ङ्क्षसह ने बताया कि कुछ किसानों ने फसल खराबा प्रतिशत में अंतर बताया है। बीमा कम्पनी की ओर से सभी कृषि विभाग को सौंपा गया है। हालांकि अभी डाटा फाइनल नहीं हुआ है, जिन जिन क्षेत्र में भी अंतर आता है तो सुधार कराया जाएगा।