बूंदी

Bundi : जान जोखिम में डालकर पार कर रहे नदी

क्षेत्र में सादेड़ा से निकलकर विषधारी के मार्ग पर मेज नदी की पुलिया छह माह से क्षतिग्रस्त है। यहां से वाहनों का आवागमन भी लंबे समय से ही बाधित है।

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May 11, 2026
भण्डेड़ा. क्षेत्र में सादेड़ा-विषधारी मार्ग पर मेज नदी की क्षतिग्रस्त पुलिया।

भण्डेड़ा. क्षेत्र में सादेड़ा से निकलकर विषधारी के मार्ग पर मेज नदी की पुलिया छह माह से क्षतिग्रस्त है। यहां से वाहनों का आवागमन भी लंबे समय से ही बाधित है। क्षेत्र के राहगीरों सहित श्रद्धालुओं को आने-जाने के लिए तीन-चार फीट पानी से होकर गुजरने को मजबूर होना पड़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार इस समस्या का अभी तक समाधान नहीं करवा पाए है।

जानकारी के अनुसार सादेड़ा से संगमेश्वर (समेला) महादेव से विषधारी के मुख्य ग्रेवल रास्ते पर मेज नदी में छोटी पुलिया बनी हुई थी, जो विषधारी से सादेड़ा की तरफ आनेवाले राहगीर बारिश बंद होते ही इससे होकर आवागमन करते थे। इधर, सादेड़ा की तरफ से विषधारी की तरफ आवाजाही वाले राहगीर भी इसी से होकर आवागमन करते थे, जो मेज व बेजाण नदी में कम पानी का बहाव का पुलिया के मौखे से निकल जाता था।

राहगीर पैदल व अपने वाहनों से आवागमन में सुगमता रहती थी। गत वर्ष बारिश का दौर अधिक लंबे समय तक चलने से यह पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई, जिस जगह पर पुलिया क्षतिग्रस्त हुई। उस जगह पर अधिक गहराई हो चुकी है। यहां से आवागमन बारिश के समय से ही बंद हो गया, जो यहां से गुजरने वाले राहगीरों को या तो अतिरिक्त फेरा लगाकर कल्याणपुरा, कालानला होते हुए विषधारी होकर आना-जाना पड़ता है।

पैदल राहगीर यहां से होकर गुजरते है, तो तीन से चार फीट पानी से होकर गुजरने से कपडे भीग जाते है। इस दरमियान लोगों को जान जोखिम में डालकर यह जगह पार करनी पड़ती है। इसी जगह पर निकट ही धार्मिक स्थल संगमेश्वर (समेला) महादेव का स्थान है, जो यहां पर दोनों तरफ से आने जाने वाले श्रद्धालुओं को भी इसी समस्या का सामना करने को मजबूर होना पड़ रहा है, लेकिन जिम्मेदार इस समस्या को लेकर गंभीर नहीं है।

ग्रामीणों की जुबानी….
ग्रामीणों ने बताया कि इस समय गर्मी के दौर की शुरुआत हो चुकी है। मेज नदी की पुलिया क्षतिग्रस्त है। यहां से आने जाने में पानी से गुजरते समय खतरा बना रहता है। दोनों नदियों के ऊपरी क्षेत्र में बडे बांध है, जिनसे नहरें चलती है। उस समय मेज व बेजाण नदी में पानी अधिक बढ़ जाता है। यहां से गुजरने के दौरान पानी कब बढ़ जाए यह पता नहीं चल पाता है। खतरा बढ़ जाता है।

बह गई मिट्टी
गत वर्ष भी बारिश के समय यह पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसे नदी में चल रहे मिनी डैम के कार्य में निर्माण सामग्री पहुंचाने वालों ने क्षतिग्रस्त पुलिया की जगह पर मिट्टी डालकर नदी में आने वाले पानी को मौखे से निकाला गया था, उस समय तो रास्ता बन गया। फिर बारिश से यहां डाली मिट्टी पानी में बह गई व यह पुलिया पहली बारिश में ही क्षतिग्रस्त हो गई थी। तब से ही यह मार्ग यहां से अवरुद्ध है।

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